हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में इन दिनों वर्किंग शिफ्ट को लेकर छिड़ी बहस थमने का नाम नहीं ले रही। मां बनने के बाद दीपिका पादुकोण द्वारा कथित तौर पर 8 घंटे की शिफ्ट की मांग किए जाने की खबरों ने इस चर्चा को और तेज कर दिया। कहा जा रहा है कि इसी वजह से उन्हें दो बड़े प्रोजेक्ट्स गंवाने पड़े। इस मुद्दे पर जहां कई सेलेब्स और फैन्स ने दीपिका का समर्थन किया, वहीं कुछ लोगों ने इसे इंडस्ट्री की प्रकृति के खिलाफ बताया। अब इस बहस में दिग्गज अभिनेता राजेंद्र चावला की एंट्री हुई है, जिन्होंने न सिर्फ शिफ्ट डिबेट पर बल्कि पैपराजी कल्चर पर भी खुलकर अपनी राय रखी।

“इंडस्ट्री में कदम रखते वक्त सच्चाई जाननी चाहिए”
Bollywood Bubble से बातचीत में राजेंद्र चावला ने साफ कहा कि फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में काम करने का एक तय ढांचा है। उनके मुताबिक, “जब आप इस इंडस्ट्री को चुनते हैं, तो पहले दिन से ये समझना जरूरी है कि यहां 12–14 घंटे की शिफ्ट आम बात है। काम का प्रेशर बहुत ज्यादा होता है। डेली सोप के सिर्फ 22–25 मिनट के एपिसोड के लिए भी दिन-रात मेहनत करनी पड़ती है।”

“रेस में हैं तो रफ्तार भी वही रखनी होगी”
उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई तय समय से कम काम करने की जिद पर अड़ा रहेगा, तो प्रोजेक्ट्स पूरे करना मुश्किल हो जाएगा। चावला के शब्दों में, “अगर आप इस रेस में हैं, तो उसी हिसाब से दौड़ना होगा। अगर ये मुमकिन नहीं है, तो 9 से 5 की नौकरी बेहतर विकल्प है। इंडस्ट्री में आने के लिए किसी ने मजबूर नहीं किया।” उनका मानना है कि मेहनत के बाद थककर सोना, निराश होकर सोने से कहीं बेहतर है।
पैपराजी कल्चर पर तीखी नाराजगी
शिफ्ट विवाद के अलावा राजेंद्र चावला ने आज के पैपराजी कल्चर पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी बातों को सनसनीखेज बनाना अब एक कारोबार बन चुका है।
यहां तक कि संवेदनशील मौकों पर भी कैमरों की होड़ दिखाई देती है। उन्होंने धर्मेंद्र के निधन से जुड़े उदाहरण का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे पलों को तमाशा बनाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।


