9.9 C
Agra
Homeउत्तर प्रदेशकिन्नर समाज में बदलती धार्मिक-सामाजिक पहचान, राम-राम ने ली सलाम की जगह

किन्नर समाज में बदलती धार्मिक-सामाजिक पहचान, राम-राम ने ली सलाम की जगह

किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर कल्याणीनंद गिरि का कहना है कि बीते कुछ वर्षों में किन्नर समाज के भीतर गहरा धार्मिक और सामाजिक परिवर्तन देखने को मिला है। उनके अनुसार पहले किन्नर समाज की गद्दियां, परंपराएं और अभिवादन प्रणाली इस्लामी रीति-रिवाजों से प्रभावित थीं, लेकिन किन्नर अखाड़े के गठन के बाद इस दिशा में बदलाव शुरू हुआ है। अब किन्नर सम्मेलनों, पंचायतों और समूह बैठकों में सलाम की जगह राम-राम का अभिवादन सुनाई देता है। महामंडलेश्वर ने बताया कि आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी के मार्गदर्शन में महाकुंभ-2025 के बाद देशभर में ऐसे किन्नरों की “घर वापसी” कराई गई, जो स्वयं को अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़ा मानने लगे थे।

उनका दावा है कि अब तक करीब 10 हजार किन्नर इस्लामी परंपराओं को छोड़कर सनातन धर्म से जुड़ चुके हैं। कल्याणीनंद गिरि ने अपने जीवन का उदाहरण साझा करते हुए बताया कि वे प्रयागराज के कटरा इलाके में एक हिंदू परिवार में जन्मी थीं, लेकिन रोज़गार की तलाश में दिल्ली जाने के बाद वर्ष 2011 में परिस्थितियों के चलते मुस्लिम परंपराओं को अपनाना पड़ा। वर्ष 2020 के हरिद्वार कुंभ में लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी से मुलाकात के बाद उन्हें किन्नर अखाड़े से जुड़ने का अवसर मिला। उनके अनुसार अखाड़ा धर्म, शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक एकता के लिए लगातार काम कर रहा है।

महामंडलेश्वर ने कहा कि पहले कई किन्नर खुद को अल्पसंख्यक मानते हुए बधाई देने जैसी परंपराओं से भी दूरी बनाए रखते थे, लेकिन अब छठ पूजा सहित कई हिंदू धार्मिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड, बिहार, केरल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में किन्नर समाज के लोग तेजी से सनातन परंपराओं से जुड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि अनेक किन्नर अब रुद्राक्ष की माला धारण कर रहे हैं, तिलक लगाकर धार्मिक सम्मेलनों में शामिल हो रहे हैं। वैष्णो देवी दर्शन के दौरान भी कई किन्नरों ने माघ मेले में आने और हिंदू धर्म अपनाने की इच्छा जताई है।

किन्नर समाज के साथ शोषण का मुद्दा भी उठाया

महामंडलेश्वर कल्याणीनंद गिरि ने किन्नर समाज के साथ होने वाले सामाजिक और शारीरिक शोषण पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई बार शादी का झांसा देकर किन्नरों को ठगा जाता है। उनके अनुसार ईश्वर ने किन्नर समाज को नृत्य और शृंगार जैसी कलाओं का वरदान दिया है, जिससे वे अपनी आजीविका चलाते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि देश में किन्नर समाज की संख्या कई अन्य समुदायों से अधिक है। किन्नर अखाड़ा आने वाली पीढ़ियों के लिए सनातन मूल्यों की रक्षा और किन्नर समाज को सम्मानजनक पहचान दिलाने के उद्देश्य से लगातार प्रयास कर रहा है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments