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एंटीबायोटिक बेअसर, होम्योपैथी बनी उम्मीद की किरण

जटिल बीमारियों में होम्योपैथी ने दिखाए सकारात्मक परिणाम

आगरा। एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक और गलत उपयोग के चलते कई गंभीर बीमारियों में उनका असर कम होता जा रहा है। इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में होम्योपैथी एक प्रभावी विकल्प के रूप में सामने आ रही है। यह बात एमडी जैन इंटर कॉलेज के सभागार में आयोजित दो दिवसीय ऑल इंडिया होम्योपैथिक कांग्रेस के समापन सत्र में विशेषज्ञों ने कही। आइडियल होम्योपैथिक वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में उदयपुर होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अनंत प्रकाश गुप्ता ने अपने शोध के निष्कर्ष प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि लिवर, किडनी, अस्थमा, सांस संबंधी रोग, निमोनिया और टीबी से पीड़ित करीब 300 ऐसे मरीजों पर अध्ययन किया गया, जिन पर एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर हो चुकी थीं।

डॉ. गुप्ता के अनुसार मरीजों के बलगम, पस और थूक के नमूनों का पांच वर्षों तक लैब में परीक्षण किया गया। इस दौरान 10 प्रकार के कीटाणुओं पर होम्योपैथिक दवाओं के प्रभाव का विश्लेषण किया गया, जिसमें 80 से 90 प्रतिशत तक सकारात्मक परिणाम सामने आए। उन्होंने बताया कि कई जटिल रोगों, जैसे कैंसर, किडनी व लिवर रोग, पेट की बीमारियां और ऑटिज्म के मामलों में भी होम्योपैथी से सुधार देखा गया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर महापौर हेमलता दिवाकर, उत्तर प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान और एमएलसी विजय शिवहरे ने कहा कि आम जनता में होम्योपैथी के प्रति विश्वास तेजी से बढ़ रहा है। यह इलाज की एक किफायती और सुरक्षित पद्धति है। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए।

कार्यशाला के आयोजक और संगठन के सचिव डॉ. पार्थसारथी शर्मा ने बताया कि सम्मेलन में प्रदेश में नए होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज खोलने, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आयुर्वेद व होम्योपैथिक क्लीनिक स्थापित करने और आयुष्मान भारत योजना में होम्योपैथी को शामिल करने जैसे प्रस्तावों पर चर्चा हुई। इन मांगों को लेकर सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा। सम्मेलन में डॉ. एनएस रघुराम, डॉ. एके सिंह, डॉ. चारू शुक्ला, सुनील जैन, राहुल जैन, सुनील बग्गा, राजदीप ग्रोवर, हरिकांत शर्मा और रोहित जैन सहित कई चिकित्सक मौजूद रहे।

प्रदूषण बना बच्चों की सेहत का दुश्मन

संगठन के अध्यक्ष डॉ. जेएन सिंह रघुवंशी ने बताया कि बढ़ते प्रदूषण के कारण बच्चों में अस्थमा, सांस की बीमारियां और फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। नाक की एलर्जी के मामले भी आम हो रहे हैं, जिससे बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि होम्योपैथिक इलाज में दुष्प्रभाव नहीं होते, जिससे बच्चे इलाज को बीच में छोड़ते नहीं हैं।

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