पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में होने वाले महानगरपालिका चुनावों को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। 2023 में हुए विभाजन के बाद पहली बार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों गुट—अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी और शरद पवार की एनसीपी (एसपी)—ने साथ मिलकर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। इसी कड़ी में शनिवार को दोनों दलों ने संयुक्त रूप से चुनावी घोषणापत्र जारी किया। घोषणापत्र जारी करने के मौके पर उपमुख्यमंत्री अजित पवार और एनसीपी (एसपी) की कार्यकारी अध्यक्ष व सांसद सुप्रिया सुले एक साथ मंच पर नजर आए। यह दृश्य दोनों गुटों के बीच बढ़ती नजदीकियों का संकेत माना जा रहा है। दोनों दल 15 जनवरी को होने वाले पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों में साझा रणनीति के तहत मैदान में उतरेंगे।
संयुक्त घोषणापत्र में शहर से जुड़े बुनियादी मुद्दों को प्राथमिकता दी गई है। इसमें हर घर तक नियमित और स्वच्छ पेयजल आपूर्ति, वायु प्रदूषण पर नियंत्रण, ट्रैफिक जाम से राहत, गड्ढामुक्त सड़कें और बेहतर साफ-सफाई व्यवस्था का वादा किया गया है। इसके अलावा हाई-टेक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और झुग्गी-झोपड़ियों के पुनर्वास को भी प्रमुख एजेंडे में शामिल किया गया है। अजित पवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह घोषणापत्र आम नागरिकों की रोजमर्रा की समस्याओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि इसमें PMPML बसों और मेट्रो में मुफ्त यात्रा, 500 वर्ग फुट तक के घरों पर प्रॉपर्टी टैक्स में छूट और छात्रों को मुफ्त कंप्यूटर टैबलेट देने जैसे प्रस्ताव भी शामिल हैं।
दिलचस्प बात यह रही कि राज्य और केंद्र में बीजेपी के साथ सत्ता में होने के बावजूद अजित पवार ने स्थानीय बीजेपी नेतृत्व पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारों से पर्याप्त फंड मिलने के बावजूद पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, एनसीपी के दोनों गुटों का एक साथ आना न सिर्फ स्थानीय चुनावों को दिलचस्प बनाएगा, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाले समय में बड़े समीकरणों की ओर भी इशारा कर रहा है।


