नई दिल्ली: बहुचर्चित लैंड फॉर जॉब मामले में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। अदालत ने लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटी मीसा भारती समेत परिवार के कई सदस्यों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए हैं। इसके साथ ही बेटे तेज प्रताप यादव, तेजस्वी यादव और बेटी हेमा यादव को भी इस मामले में आरोपी माना गया है। हालांकि, इस केस में राहत की खबर यह रही कि कुल 98 आरोपियों में से 52 लोगों को कोर्ट ने आरोपों से मुक्त कर दिया है।
क्या है लैंड फॉर जॉब मामला?
लैंड फॉर जॉब मामला कथित तौर पर 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि उस दौरान रेलवे के ग्रुप-डी पदों पर भर्तियां की गईं और बदले में उम्मीदवारों या उनके परिजनों से जमीन ली गई। ये जमीनें या तो बेहद कम कीमत पर ली गईं या फिर कथित तौर पर गिफ्ट के रूप में लालू परिवार के सदस्यों के नाम कराई गईं। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह पूरा मामला पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है।
किन-किन पर तय हुए आरोप?
जांच के बाद इस केस में लालू यादव, राबड़ी देवी, तेज प्रताप यादव, तेजस्वी यादव, मीसा भारती और हेमा यादव समेत कुल 98 लोगों को आरोपी बनाया गया था। अब कोर्ट ने लालू परिवार के इन सदस्यों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं, जबकि अन्य 52 आरोपियों को क्लीन चिट मिल गई है।
कितनी हो सकती है सजा?
इस मामले में संभावित सजा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के वकील संदीप मिश्रा ने बताया कि आरोपियों पर प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की कई धाराएं लगाई गई हैं। इनमें अधिकतम 7 साल तक की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा आईपीसी की धारा 467, 468 और 471 भी शामिल हैं, जिनके तहत सजा 10 साल तक पहुंच सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोर्ट सभी सजाओं को एक साथ चलाने का आदेश देती है, तो आरोपी को अधिकतम सजा ही भुगतनी होगी। लेकिन अगर सजाएं अलग-अलग क्रम में चलाने का फैसला हुआ, तो जेल की अवधि बढ़ भी सकती है।


