अमेरिका ने अटलांटिक महासागर में एक रूसी तेल टैंकर को जब्त कर लिया है, जिसे पहले बेला-1 के नाम से जाना जाता था और बाद में इसका नाम बदलकर मारिनेरा कर दिया गया था। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार यह जहाज लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने की कोशिश कर रहा था और अंततः दो सप्ताह से अधिक चले हाई-प्रोफाइल पीछा अभियान के बाद इसे रोक लिया गया। यह घटना इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि हाल के वर्षों में पहली बार अमेरिका ने खुले तौर पर रूसी झंडे वाले किसी तेल टैंकर को जब्त किया है।
ईरान से यात्रा, वेनेजुएला की योजना
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह टैंकर पहले ईरान से रवाना हुआ था। उसने स्वेज नहर और जिब्राल्टर जलडमरूमध्य पार किया और बाद में वेनेजुएला से तेल लोड करने की योजना बना रहा था। इसी दौरान अमेरिका ने उस पर निगरानी कड़ी कर दी, यह आरोप लगाते हुए कि जहाज प्रतिबंधित तेल के परिवहन में शामिल है।
कैरिबियन में पहली मुठभेड़
21 दिसंबर को कैरिबियन सागर में अमेरिकी तटरक्षक बल ने इस टैंकर को रोका। उस समय जहाज किसी वैध राष्ट्रीय झंडे के बिना चल रहा था, जिसे अमेरिकी कानून के तहत जब्ती का आधार माना गया। हालांकि, चालक दल ने बोर्डिंग की अनुमति देने से इनकार कर दिया और जहाज अटलांटिक की ओर भाग निकला। इसके बाद अमेरिकी बल लगातार इसकी निगरानी करते रहे।
झंडा बदला, नाम बदला, लेकिन राहत नहीं
पकड़े जाने से बचने के लिए चालक दल ने जहाज के बाहरी हिस्से पर रूसी झंडा पेंट कर दिया। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के अनुसार किसी देश का झंडा फहराने से जहाज को उस देश का संरक्षण मिल सकता है, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने इस दलील को खारिज कर दिया। इसके बाद जहाज का नाम बदलकर मारिनेरा कर दिया गया और इसे रूस की आधिकारिक शिपिंग रजिस्ट्री में दर्ज कराया गया, जहां इसका होम पोर्ट सोची बताया गया। फिर भी अमेरिका ने कार्रवाई जारी रखी।
रूस की आपत्ति और अमेरिकी निगरानी
रूस ने न्यू ईयर ईव पर अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट से औपचारिक अनुरोध किया कि इस टैंकर का पीछा रोका जाए। अमेरिका ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि जहाज ईरानी तेल ढो रहा है और सीधे तौर पर अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा है। इस दौरान अमेरिकी और ब्रिटिश निगरानी विमानों ने लगातार टैंकर पर नजर रखी। आइसलैंड स्थित अमेरिकी बेस से उड़ान भरने वाले विमान और ब्रिटिश P-8 पोसिडॉन समुद्री गश्ती विमान इस अभियान में शामिल रहे। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि रूसी नौसेना ने टैंकर की सुरक्षा के लिए पनडुब्बियां तैनात की थीं।
आखिरकार जब्ती
बुधवार को अमेरिकी तटरक्षक बल ने उत्तरी अटलांटिक में मारिनेरा को अपने नियंत्रण में ले लिया। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि प्रतिबंधित तेल के खिलाफ कार्रवाई केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर लागू की जाएगी।
क्यों अहम था यह टैंकर?
विशेषज्ञों का कहना है कि यह जहाज तथाकथित “शैडो फ्लीट” का हिस्सा था—ऐसा नेटवर्क जिसका इस्तेमाल रूस, ईरान और वेनेजुएला जैसे देश प्रतिबंधों से बचते हुए तेल की ढुलाई के लिए करते हैं। यह टैंकर पहले ही 2024 में अमेरिकी प्रतिबंधों की सूची में शामिल किया जा चुका था और उस पर अवैध कार्गो ले जाने के आरोप भी थे।


