भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वेनेजुएला में हाल ही में उभरे गंभीर हालात पर गहरी चिंता व्यक्त की है। बुधवार को लक्ज़मबर्ग दौरे के दौरान उन्होंने कहा कि मौजूदा संकट के बीच सबसे बड़ी प्राथमिकता वेनेजुएला के आम नागरिकों की सुरक्षा और भलाई होनी चाहिए। लक्ज़मबर्ग में उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री के साथ द्विपक्षीय बातचीत के दौरान जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से संयम बरतने और संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की, ताकि वेनेजुएला के लोगों को इस अस्थिरता का खामियाजा न भुगतना पड़े।
जयशंकर का क्या कहना है?
विदेश मंत्री ने कहा, “भारत हाल के घटनाक्रमों को लेकर चिंतित है। हम सभी पक्षों से आग्रह करते हैं कि वे बैठकर ऐसा रास्ता निकालें जो वेनेजुएला के लोगों के हित, कल्याण और सुरक्षा को सुनिश्चित करे।” उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत और वेनेजुएला के बीच लंबे समय से घनिष्ठ संबंध रहे हैं और भारत चाहता है कि वहां के लोग जल्द से जल्द इस संकट से बाहर निकलें।
‘देश अपने हित पहले देखते हैं’
वैश्विक राजनीति पर टिप्पणी करते हुए जयशंकर ने कहा कि आज की दुनिया में देश वही कदम उठाते हैं जिससे उन्हें सीधा फायदा हो। उन्होंने कहा, “अक्सर देश दूसरों को मुफ्त सलाह देते हैं, लेकिन जब अपने क्षेत्र की बात आती है तो वही मानक लागू नहीं करते। दुनिया का यही स्वभाव है—जो कहा जाता है, वह हमेशा किया नहीं जाता। हमें इस वास्तविकता को समझते हुए आगे बढ़ना होगा।”
कैसे भड़का वेनेजुएला संकट?
जानकारी के मुताबिक, यह संकट 3 जनवरी को तब और गहरा गया जब अमेरिकी सेना ने काराकास में अचानक सैन्य कार्रवाई की। इस ऑपरेशन के दौरान वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लेकर अमेरिका ले जाया गया। यह कार्रवाई डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दी जा रही लंबे समय से चेतावनियों के बाद हुई। अमेरिका ने मादुरो पर ड्रग कार्टेल और नार्को-आतंकवाद से जुड़े होने के आरोप लगाए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, मादुरो और उनकी पत्नी को न्यूयॉर्क की कुख्यात ब्रुकलिन जेल में रखा गया है।


