दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को नीतीश कटारा हत्याकांड में दोषी ठहराए गए विकास यादव की 21 दिन की फरलो याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। विकास यादव इस मामले में 25 साल की सजा काट रहे हैं और वे पूर्व सांसद डीपी यादव के पुत्र हैं। इससे पहले दिल्ली सरकार ने उनकी फरलो की मांग को खारिज कर दिया था, जिसे अब उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
न्यायमूर्ति रविंदर दुडेजा की पीठ ने विकास यादव, दिल्ली सरकार, मामले के गवाह अजय कटारा और शिकायतकर्ता नीलम कटारा की ओर से रखी गई दलीलों को सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित रखा। सुनवाई के दौरान गवाह अजय कटारा की ओर से पेश अधिवक्ता संचार आनंद ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल को लगातार जान का खतरा बना हुआ है और उन्हें झूठे मामलों में फंसाया गया है। उन्होंने दलील दी कि ऐसे हालात में दोषी को फरलो पर रिहा करने का कोई औचित्य नहीं है।
वहीं विकास यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने इन तर्कों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि पिछले लगभग 20 वर्षों से विकास यादव की निगरानी के लिए 10 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं, ऐसे में पुलिस की मौजूदगी में किसी को झूठे मामले में फंसाना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि विकास यादव पिछले 23 वर्षों से निरंतर हिरासत में हैं। अदालत को यह भी बताया गया कि 22 सितंबर को जेल अधिकारियों के समक्ष एक आवेदन प्रस्तुत किया गया था, जिसमें हाल ही में हुए विवाह और उससे जुड़ी सामाजिक एवं वैवाहिक जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए पैरोल की मांग की गई थी। आवेदन में दिल्ली कारागार नियम, 2018 के तहत लंबे कारावास के दौरान विकास यादव के निर्विवाद अच्छे आचरण का उल्लेख किया गया था।


