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दर्दनाक हादसा: पेट्रोल पंप के कमरे में सो रहे मैनेजर-सेल्समैन की दम घुटने से मौत

पेट्रोल पंप पर सुरक्षा में चूक! जनरेटर के धुएं से दो युवकों की मौत

फिरोजाबाद जिले के थाना नारखी क्षेत्र अंतर्गत नगला सोंठ गांव स्थित एक पेट्रोल पंप पर शुक्रवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब पंप के एक कमरे में सो रहे मैनेजर और सेल्समैन की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। शुरुआती जांच में सामने आया है कि दोनों की जान कमरे में भरे जनरेटर के जहरीले धुएं के कारण दम घुटने से गई। मृतकों की पहचान इटावा जनपद के थाना वैदपुरा क्षेत्र के रूपपुरा गांव निवासी मोहित (25) पुत्र राजेंद्र सिंह और सागर पुत्र चंद्रपाल के रूप में हुई है। मोहित पेट्रोल पंप पर मैनेजर के पद पर कार्यरत था, जबकि सागर सेल्समैन के रूप में तैनात था। बताया गया कि गुरुवार रात दोनों पंप परिसर में बने एक ही कमरे में सोए थे।

पंप पर काम करने वाले उनके साथी रवि ने बताया कि वह पास के दूसरे कमरे में सो रहा था। शुक्रवार सुबह करीब सात बजे तक जब मोहित और सागर बाहर नहीं निकले, तो उसने उन्हें आवाज दी। कोई जवाब न मिलने पर दरवाजा खटखटाया गया और खिड़की से पानी भी डाला गया, लेकिन अंदर से कोई हलचल नहीं हुई। इस पर अनहोनी की आशंका हुई और पंप मालिक कुलदीप को सूचना दी गई, जिन्होंने तुरंत पुलिस को बुलाया। मौके पर पहुंची पुलिस ने दरवाजा तोड़कर कमरे में प्रवेश किया, जहां दोनों युवक अचेत अवस्था में पड़े मिले। कमरे में ही जनरेटर रखा हुआ था, जिससे निकले धुएं और कार्बन मोनोऑक्साइड गैस के कारण दम घुटने की आशंका जताई जा रही है। दोनों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सीओ टूंडला अमरीश कुमार ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला दम घुटने से मौत का प्रतीत हो रहा है, हालांकि वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।

एम्बुलेंस पर लापरवाही का आरोप, उठे सवाल

इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। मृतकों के साथी रवि का आरोप है कि जब एम्बुलेंस मौके पर पहुंची, उस समय दोनों युवकों की सांसें चल रही थीं। उम्मीद थी कि उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया जाएगा, लेकिन आरोप है कि एम्बुलेंस कर्मियों ने इसे पुलिस केस बताकर दोनों को वहीं छोड़ दिया और बिना इलाज के लौट गए।

एम्बुलेंस के चले जाने के बाद पुलिस ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए दोनों को खुद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां आईसीयू में डॉक्टरों ने सीपीआर समेत हरसंभव प्रयास किया। लेकिन फेफड़ों में जहरीला धुआं अधिक मात्रा में भर जाने के कारण दोनों की जान नहीं बचाई जा सकी। फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और परिजनों को घटना की जानकारी दे दी गई है। यह हादसा सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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