बांग्लादेश के फरीदपुर में शुक्रवार रात लोकप्रिय गायक जेम्स के प्रस्तावित कंसर्ट के दौरान अफरा-तफरी मच गई। रात करीब 9 बजे कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही एक उग्र भीड़ आयोजन स्थल में घुस आई और दर्शकों पर ईंट-पत्थर बरसाने लगी। हमले में कम से कम 20 लोग घायल हुए, जिसके बाद आयोजकों को कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हालात इतने बिगड़ गए कि मौजूद लोग अपनी सुरक्षा के लिए इधर-उधर भागने लगे। विरोध की कोशिशें नाकाम रहीं और सुरक्षा व्यवस्था भी भीड़ को रोकने में असफल रही। जेम्स—जो बांग्लादेश के जाने-माने गायक, गीतकार और गिटारवादक हैं—देश के साथ-साथ भारत में भी लोकप्रिय हैं और हिंदी फिल्मों के लिए भी गाने गा चुके हैं।

कलाकारों पर बढ़ते हमलों पर चिंता
घटना का वीडियो साझा करते हुए बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर देश में कलाकारों और सांस्कृतिक संस्थानों पर बढ़ते हमलों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने लिखा कि प्रतिष्ठित सांस्कृतिक केंद्र छायानाट और प्रगतिशील सांस्कृतिक संगठन उदिची को भी नुकसान पहुंचाया गया है।
कलाकारों का बांग्लादेश आने से परहेज
नसरीन के अनुसार, हाल के दिनों में कई नामचीन कलाकारों ने सुरक्षा कारणों से बांग्लादेश आने से इनकार किया है। उस्ताद अलाउद्दीन खान के पोते सिराज अली खान और उस्ताद राशिद खान के बेटे अरमान खान ने भी ढाका के निमंत्रण ठुकरा दिए। उनका कहना है कि जब तक कलाकारों और सांस्कृतिक संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, वे वापस नहीं आएंगे।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और सुरक्षा पर सवाल
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद देश में भीड़ हिंसा की घटनाओं में इजाफा होने की बात कही जा रही है। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर कट्टरपंथी तत्वों को नियंत्रित न कर पाने के आरोप लग रहे हैं, हालांकि सरकार स्थिति संभालने के दावे करती रही है। फरवरी में होने वाले संसदीय चुनावों से पहले माहौल और तनावपूर्ण बताया जा रहा है। हाल ही में प्रचार के दौरान एक युवा नेता की हत्या के बाद हिंसक घटनाओं में बढ़ोतरी की खबरें भी सामने आई हैं।
यूनुस सरकार पर हसीना का हमला
एएनआई को ईमेल इंटरव्यू में शेख हसीना ने कहा कि उनके कार्यकाल के बाद अराजकता कई गुना बढ़ गई है। उन्होंने अल्पसंख्यकों पर हमलों और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं देश को अंदरूनी तौर पर कमजोर करती हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी विश्वसनीयता को भी नुकसान पहुंचाती हैं।


