कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर पूर्वोत्तर संपर्क क्रांति एक्सप्रेस से पकड़े गए मो. इब्राहिम से पूछताछ में कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। जांच में पता चला है कि वह पिछले एक साल से जम्मू के नरवाल स्थित रिफ्यूजी कैंप में शरणार्थी पास पर रह रहा था और असम के रास्ते रोहिंग्याओं को जम्मू में बसाने का काम कर रहा था। इसी सिलसिले में वह अपने साथी 21 वर्षीय मो. हासिम (पुत्र नूर अहमद) और अपनी नाबालिग साली के साथ दो महीने पहले अवैध रूप से सीमा पार कर भारत में दाखिल हुआ था। तीनों असम से दिल्ली होते हुए जम्मू जाने की योजना बना रहे थे, लेकिन कानपुर में आरपीएफ ने उन्हें ट्रेन से गिरफ्तार कर लिया। जांच एजेंसियों के अनुसार, इब्राहिम इससे पहले जम्मू के आतंक प्रभावित इलाकों में भी आवाजाही कर चुका है। इस पूरे मामले की जानकारी आरपीएफ के सहायक सुरक्षा आयुक्त विवेक वर्मा, जीआरपी के डिप्टी एसपी और आरपीएफ सेंट्रल पोस्ट के प्रभारी निरीक्षक एनएन पाटीदार ने पत्रकारों को दी।
2017 से बांग्लादेश के शरणार्थी शिविर में था इब्राहिम
अधिकारियों ने बताया कि हेल्पलाइन पर मिली सूचना के आधार पर तीनों को पकड़ा गया। पूछताछ में सामने आया कि ये तीनों म्यांमार के रोहिंग्या नागरिक हैं। गुरुवार तड़के तक आईबी, एटीएस, आर्मी इंटेलिजेंस और एलआईयू की टीमों ने उनसे गहन पूछताछ की। इब्राहिम ने कबूल किया कि वह वर्ष 2017 से बांग्लादेश के शरणार्थी शिविर में रह रहा था। इसके बाद 2024 में वह जम्मू के नरवाल पहुंचा, जहां उसका संपर्क एक लेबर सिंडिकेट से हो गया।
मजदूर सप्लाई नेटवर्क से जुड़ा था आरोपी
आरोपी ने बताया कि वह इस सिंडिकेट के लिए मजदूरों को यूपी, दिल्ली, पंजाब, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, राजस्थान और जम्मू जैसे राज्यों में भेजने का काम करता था। उसके संपर्क में म्यांमार के 100 से अधिक रोहिंग्या बताए जा रहे हैं। फिलहाल तीनों आरोपियों के खिलाफ आव्रजन एवं विदेशी अधिनियम-2025 की धारा 21 के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया है। मामले की जांच अभी जारी है।


