मलकानगिरि से एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। ओडिशा-छत्तीसगढ़ सीमा पर सक्रिय माओवादी नेटवर्क को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब मंगलवार को 22 माओवादियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। यह सरेंडर ओडिशा के पुलिस महानिदेशक वाई.बी. खुरानिया और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले ये माओवादी लंबे समय से छत्तीसगढ़ और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों में हिंसक गतिविधियों में शामिल थे। सरेंडर के दौरान उन्होंने बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री भी सुरक्षा बलों को सौंपी।

भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद
पुलिस को माओवादियों से कुल 9 आग्नेयास्त्र, 150 जिंदा कारतूस, करीब 20 किलोग्राम विस्फोटक, 13 आईईडी, जिलेटिन की छड़ें और अन्य आपत्तिजनक सामग्री मिली है। अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वालों में से अधिकांश मूल रूप से छत्तीसगढ़ के निवासी हैं, लेकिन ओडिशा के जंगलों में सक्रिय थे। इस समूह में सुकमा जिले का डिविजनल कमेटी मेंबर लिंगे उर्फ मायरे मड़कम (45) और दंतेवाड़ा जिले का एरिया कमेटी सदस्य कमांडर बामन मड़कम (27) भी शामिल है। सरकार द्वारा हाल ही में घोषित संशोधित आत्मसमर्पण नीति और इनाम राशि को भी इस फैसले की बड़ी वजह माना जा रहा है।
मुख्यधारा में लौटने की उम्मीद
ओडिशा पुलिस ने इस घटनाक्रम को शांति की दिशा में बड़ा कदम बताया है। अधिकारियों का कहना है कि सरेंडर करने वाले उग्रवादियों के पुनर्वास और सामाजिक पुनर्स्थापन के लिए सरकार की योजनाएं लागू की जाएंगी, जिससे वे हिंसा छोड़कर सामान्य जीवन जी सकें।
तेलंगाना में भी दिखा असर
इससे पहले तेलंगाना में भी माओवादी संगठन भाकपा (माओवादी) को बड़ा झटका लगा था, जहां 41 उग्रवादियों ने हथियार डाल दिए थे। इनमें कई शीर्ष स्तर के कैडर शामिल थे। तेलंगाना पुलिस के अनुसार, इन लोगों ने दर्जनों आधुनिक हथियार और सैकड़ों कारतूस जमा कराए और औपचारिक रूप से हिंसा से तौबा कर ली।


