दक्षिण-पूर्व एशिया में बढ़ते तनाव को थामने के लिए आसियान देशों ने एक बार फिर पहल की है। कुआलालंपुर में सोमवार को आसियान सदस्य देशों के विदेश मंत्री जुट रहे हैं, जहां थाईलैंड और कंबोडिया के बीच जारी सैन्य टकराव को रोकने के उपायों पर चर्चा होगी। यह दूसरी बार है जब संगठन अपने ही सदस्य देशों के बीच सुलह कराने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
अमेरिकी मध्यस्थता से बना संघर्ष विराम ज्यादा दिन नहीं चला
दोनों देशों के बीच लंबे समय से चला आ रहा सीमा विवाद जुलाई में खुले संघर्ष में बदल गया था। उसी दौरान अमेरिका की मध्यस्थता में संघर्ष विराम पर सहमति बनी थी, जिसे आसियान सम्मेलन के दौरान औपचारिक रूप दिया गया। उस बैठक में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी मौजूद थे। हालांकि यह समझौता ज्यादा टिक नहीं पाया और करीब दो हफ्ते पहले संघर्ष विराम टूटने के बाद फिर से हमले शुरू हो गए।
कूटनीति पर जोर, दोनों देशों की बैठक में आने की पुष्टि
अमेरिकी विदेश विभाग ने हालात पर चिंता जताते हुए दोनों देशों से सैन्य गतिविधियां रोकने, भारी हथियार हटाने और बारूदी सुरंगों के इस्तेमाल से बचने की अपील की है। थाईलैंड के विदेश मंत्री सिहासक फुंगकेटकेओ ने बताया कि उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बातचीत की है और शांति बहाली के लिए थाईलैंड की प्रतिबद्धता दोहराई है। वहीं कंबोडिया ने भी स्पष्ट किया है कि उसके विदेश मंत्री प्राक सोखोन इस बैठक में शामिल होंगे और बातचीत व कूटनीति के रास्ते समाधान की कोशिश करेंगे।
8 दिसंबर से फिर भड़की हिंसा, भारी नुकसान
तनाव का ताजा दौर 8 दिसंबर को तब शुरू हुआ जब सीमा पर हुई झड़प में दो थाई सैनिक घायल हो गए। इसके बाद हालात तेजी से बिगड़ते चले गए। थाईलैंड ने एफ-16 लड़ाकू विमानों से हवाई हमले किए, जबकि कंबोडिया की ओर से ट्रक-माउंटेड लॉन्चरों से बड़ी संख्या में BM-21 रॉकेट दागे गए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बीते एक हफ्ते में दोनों ओर मिलाकर दो दर्जन से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और करीब पांच लाख लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं।


