राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री माणिकराव कोकाटे ने धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में निचली अदालत द्वारा सुनाई गई दो साल की सजा पर रोक लगाने के लिए बुधवार को बॉम्बे उच्च न्यायालय का रुख किया। 67 वर्षीय कोकाटे ने अदालत से आग्रह किया है कि उनकी दोषसिद्धि और सजा पर अस्थायी रूप से रोक लगाई जाए, ताकि वे निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में अपना कार्यकाल जारी रख सकें।
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी जनप्रतिनिधि को आपराधिक मामले में दो साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो उसकी विधायकी स्वतः समाप्त हो जाती है। इसी आधार पर कोकाटे की ओर से पेश अधिवक्ता अनिकेत निकम ने न्यायमूर्ति आर.एन. लड्ढा के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि राहत नहीं मिली, तो कोकाटे को मंत्री पद से अयोग्य ठहराया जा सकता है।
हालांकि, हाईकोर्ट के आगामी शीतकालीन अवकाश को ध्यान में रखते हुए निकम ने अनुरोध किया कि याचिका पर 19 दिसंबर को सुनवाई की जाए। इस मांग का विरोध नासिक के सामाजिक कार्यकर्ता शरद शिंदे पाटिल की ओर से पेश अधिवक्ता अनुकूल सेठ ने किया। सेठ ने अदालत को बताया कि कोकाटे ने सामान्य कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के बजाय खुद को लीलावती अस्पताल में भर्ती कर लिया है और उनसे जमानत बांड सरेंडर करने की मांग की। कोकाटे के वकील ने यह भी कहा कि यह मामला केवल दोषसिद्धि और सजा पर अस्थायी रोक से जुड़ा है और इस पर बहस अधिकतम दस मिनट में पूरी हो सकती है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद करीब तीन दशक पुराना है। वर्ष 1989 से 1992 के बीच राज्य सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए एक आवास योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत पात्रता की शर्त यह थी कि आवेदक की वार्षिक आय 30 हजार रुपये से अधिक न हो। आरोप है कि माणिकराव कोकाटे और उनके भाई विजय कोकाटे ने फ्लैट हासिल करने के लिए अपनी आय से संबंधित फर्जी हलफनामा दाखिल किया और खुद को पात्र दिखाया। इसके आधार पर दोनों को वर्ष 1994 में नासिक में EWS श्रेणी के फ्लैट आवंटित कर दिए गए।
मामले से जुड़े दस्तावेजों और सबूतों पर विचार करने के बाद सत्र न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। कोकाटे को भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 465 (जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) और 471 (फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल) के तहत दोषी ठहराया गया था। अभियोजन पक्ष ने नासिक अदालत में कथित फर्जीवाड़े से जुड़े कई दस्तावेज पेश किए थे, जिन्हें ध्यान में रखते हुए अदालत ने कोकाटे को किसी भी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया।


