ट्रंप प्रशासन का सख्त फैसला, पांच और देशों पर अमेरिका का पूरा ट्रैवल बैन
अमेरिका जाने का सपना देख रहे लोगों के लिए एक बार फिर बुरी खबर सामने आई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी प्रशासन ने इमिग्रेशन और यात्रा नियमों को और सख्त कर दिया है। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सरकार ने ट्रैवल बैन की सूची में कई नए देशों को जोड़ दिया है, जिससे हजारों लोगों की अमेरिका यात्रा पर असर पड़ेगा। यह फैसला ऐसे वक्त में लिया गया है, जब हाल ही में थैंक्सगिविंग वीकेंड के दौरान दो नेशनल गार्ड जवानों पर गोलीबारी के मामले में एक अफगान नागरिक की गिरफ्तारी हुई थी। इस घटना के बाद अमेरिकी सरकार ने बॉर्डर सिक्योरिटी और एंट्री सिस्टम को और मजबूत करने की जरूरत बताई है।
ट्रंप प्रशासन का कहना क्या है?
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह कदम देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने और अवैध या संदिग्ध प्रवेश को रोकने के लिए उठाया गया है। प्रशासन का दावा है कि सख्त नियमों से संभावित खतरों पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।
पहले से किन देशों पर थी पाबंदी?
जून में राष्ट्रपति ट्रंप ने 12 देशों के नागरिकों के अमेरिका आने पर पूरी तरह रोक लगाने का ऐलान किया था। इन देशों में अफगानिस्तान, म्यांमार, चाड, कांगो गणराज्य, इक्वेटोरियल गिनी, इरिट्रिया, हैती, ईरान, लीबिया, सोमालिया, सूडान और यमन शामिल थे। इसके अलावा सात देशों—बुरुंडी, क्यूबा, लाओस, सिएरा लियोन, टोगो, तुर्कमेनिस्तान और वेनेजुएला—पर आंशिक प्रतिबंध लागू किए गए थे।
अब किन नए देशों पर लगा पूरा बैन?
ताजा फैसले के तहत पांच और देशों को पूरी तरह ट्रैवल बैन की सूची में डाल दिया गया है। इनमें बुर्किना फासो, माली, नाइजर, साउथ सूडान और सीरिया शामिल हैं।
इसके साथ ही फिलिस्तीनी अथॉरिटी द्वारा जारी ट्रैवल डॉक्यूमेंट रखने वाले लोगों की अमेरिका यात्रा पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
आंशिक प्रतिबंधों की सूची भी बढ़ी
अमेरिका ने 15 और देशों को आंशिक प्रतिबंधों के दायरे में रखा है। इस सूची में अंगोला, एंटीगुआ और बारबुडा, बेनिन, कोट डी आइवर, डोमिनिका, गैबॉन, गाम्बिया, मलावी, मॉरिटानिया, नाइजीरिया, सेनेगल, तंजानिया, टोंगा, जाम्बिया और जिम्बाब्वे शामिल हैं।
क्या होगा असर?
इस फैसले से स्टूडेंट्स, टूरिस्ट्स और वर्क वीज़ा पर अमेरिका जाने की योजना बना रहे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। आने वाले दिनों में इस फैसले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रिया तेज़ होने की संभावना है।


