चुनाव आयोग की कार्यशैली पर सवाल, अखिलेश और तिवारी ने संसद में साधा निशाना
नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी प्रमुख और लोकसभा सांसद अखिलेश यादव ने मंगलवार को संसद में उत्तर प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) की मौतों पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि मृतक अधिकारियों के परिजनों को आर्थिक सहायता के साथ-साथ सरकारी नौकरी भी प्रदान की जाए।
चुनावी सुधारों पर चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने बताया कि एसआईआर प्रक्रिया के बीच अब तक 10 बीएलओ की जान जा चुकी है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि प्रत्येक मृतक के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए और परिवार के एक सदस्य को सरकारी सेवा में समायोजित किया जाए।
साथ ही उन्होंने एक बार फिर चुनावों में मतपत्र प्रणाली लागू करने की अपनी पार्टी की पुरानी मांग को दोहराया। उनका कहना था कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं, ऐसे में बैलेट पेपर ही अधिक भरोसेमंद विकल्प है।
वहीं, कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उसकी निष्पक्षता पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि संसद में आयोग की निष्पक्षता पर चर्चा करनी पड़ रही है।
मनीष तिवारी ने सुझाव दिया कि चुनाव आयोग के सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि चयन समिति में लोकसभा में नेता विपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल किया जाए, ताकि आयोग की स्वतंत्रता और पारदर्शिता और मजबूत हो सके।


