उत्तर प्रदेश में अवैध घुसपैठ पर सख्ती, 17 जिलों में चला सत्यापन अभियान

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान प्रशासन ने अवैध घुसपैठियों की पहचान तेज़ कर दी है। राज्य भर में यूपी पुलिस की ओर से वेरिफिकेशन ड्राइव चलाई जा रही है। लखनऊ, मेरठ, वाराणसी, कानपुर, बुलंदशहर, आगरा समेत अनेक जिलों में पुलिस की टीमें घर-घर और झुग्गी बस्तियों में दस्तावेज़ों की जांच कर रही हैं।
इस अभियान के तहत लोगों से आधार कार्ड, मोबाइल नंबर समेत पहचान से जुड़े कागजात मांगे जा रहे हैं और संदिग्ध पाए गए व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, बीती रात भी करीब 17 जिलों में विशेष तलाशी अभियान चलाकर संदिग्ध घुसपैठियों को चिन्हित किया गया।
मेरठ में सबसे बड़ा सत्यापन अभियान
मेरठ जिले में पुलिस की टीमों ने 52 अलग-अलग स्थानों पर सघन जांच की। इस दौरान लगभग 6,500 लोगों को संदिग्ध श्रेणी में चिन्हित किया गया, जिनमें से करीब 3,200 व्यक्तियों के दस्तावेज़ों को दोबारा जांच के दायरे में रखा गया है। वहीं मुजफ्फरनगर में ‘ऑपरेशन टॉर्च’ के तहत सड़क किनारे झुग्गियों में रहने वाले बाहरी लोगों के रिकॉर्ड खंगाले गए।
मुख्यमंत्री योगी का प्रदेशवासियों को संदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की जनता के नाम एक पत्र जारी कर अवैध घुसपैठ के खिलाफ कड़े कदम उठाने की बात दोहराई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सुरक्षा, कानून व्यवस्था और सामाजिक संतुलन बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। इसी लक्ष्य के तहत रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों पर कड़ी कार्रवाई जारी है।
सीएम ने जनता से अपील की कि किसी भी घरेलू या व्यावसायिक काम के लिए लोगों को नियुक्त करने से पहले उनकी पहचान और दस्तावेजों की पूरी जांच जरूर करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा केवल सरकार की नहीं बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री के पत्र की प्रमुख बातें
- प्रदेश में अवैध रूप से रहना अब किसी भी हाल में स्वीकार नहीं होगा।
- सरकारी संसाधनों पर केवल नागरिकों का अधिकार है, घुसपैठियों का नहीं।
- सभी नगर निकायों को संदिग्धों की पहचान कर सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए।
- फर्जी दस्तावेजों और अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए सख्ती।
- योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे, यह सरकार की प्राथमिकता।
- पकड़े गए घुसपैठियों को डिटेंशन सेंटर भेजा जा रहा है।
- राज्य के प्रत्येक मंडल में डिटेंशन केंद्र स्थापित किए गए हैं।
- किसी भी व्यक्ति को रोजगार देने से पहले उसकी पहचान सुनिश्चित करने को अनिवार्य बताया गया।
- प्रदेश की सुरक्षा सभी नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है।


