भारत में म्यूचुअल फंड सेक्टर जिस तेजी से आगे बढ़ रहा है, वह काबिल-ए-तारीफ जरूर है, लेकिन इसके साथ एक गंभीर चुनौती भी खड़ी हो रही है। खुद SEBI के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने इसे लेकर निवेशकों को सावधान किया है। उनका कहना है कि आज बड़ी संख्या में लोग निवेश तो कर रहे हैं, मगर यह समझे बिना कि उनका पैसा किस स्कीम में और किन शर्तों पर लगाया जा रहा है। पुदुचेरी में NSE की ओर से आयोजित एक निवेशक जागरूकता कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि तेजी से डिजिटल होते फाइनेंशियल सिस्टम में वित्तीय समझ अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बन चुकी है। जैसे-जैसे आम लोगों की जिंदगी निवेश और बाजार से जुड़ रही है, वैसे-वैसे सही जानकारी के बिना उठाया गया हर कदम जोखिम में तब्दील हो रहा है।

छोटे शहरों में भी बढ़ा निवेश का क्रेज
तुहिन कांत पांडे के मुताबिक पुदुचेरी जैसे छोटे केन्द्रों में भी किस्मत आजमाने वालों की संख्या जबरदस्त तरीके से बढ़ी है। वित्त वर्ष 2015 में जहां यहां महज 22 हजार निवेशक थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर करीब 1.24 लाख तक पहुंच चुका है। बेहतर आय स्तर, 85 प्रतिशत से ज्यादा साक्षरता दर और डिजिटल प्लेटफॉर्म की आसान पहुंच ने इस बदलाव को रफ्तार दी है।
पूरे देश में रिकॉर्ड भागीदारी
राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति और भी बड़ी दिखाई देती है। अक्टूबर 2025 तक देश में 21 करोड़ से अधिक डिमैट अकाउंट दर्ज हो चुके हैं और रोजाना करीब एक लाख नए खाते खुल रहे हैं। बीते 10 सालों में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का आकार करीब सात गुना बढ़कर 80 ट्रिलियन रुपये तक जा पहुंचा है।
आंकड़ों के पीछे छिपी सच्चाई
तेजी से बढ़ते इन आंकड़ों के बीच SEBI चेयरमैन ने जो खुलासा किया, वह सोचने पर मजबूर करता है। SEBI Investor Survey 2025 के मुताबिक महज 36% निवेशकों को शेयर बाजार की सही समझ है, जबकि लगभग 62% लोग निवेश फैसलों के लिए दोस्तों, रिश्तेदारों या सोशल मीडिया की राय पर निर्भर हैं। तुहिन कांत पांडे ने साफ कहा कि जागरूकता और समझ के बीच बड़ा फर्क है। सिर्फ निवेश शुरू कर देना काफी नहीं — जब तक सही जानकारी नहीं होगी, तब तक मार्केट में कदम रखना जोखिम से भरा सौदा बना रहेगा।


