दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तीसरी बार अपना फैसला टाल दिया है। कोर्ट को यह तय करना है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया जाए या नहीं। अब इस मामले में अगली सुनवाई और संभावित फैसला 16 दिसंबर को सुनाया जाएगा। इससे पहले कोर्ट में बहस पूरी होने के बाद 14 जुलाई को फैसला सुरक्षित रखा गया था, जिसे पहले 29 जुलाई, फिर 8 अगस्त और बाद में 29 नवंबर तक टाल दिया गया।

चार्जशीट में कई कांग्रेस नेताओं के नाम
ED ने अपनी चार्जशीट में PMLA कानून के तहत सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा, सुमन दुबे सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को आरोपी बनाया है। एजेंसी का आरोप है कि नेशनल हेराल्ड से जुड़ी कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) के लेन-देन में वित्तीय अनियमितताएं हुईं। AJL वही कंपनी है जो पहले नेशनल हेराल्ड अखबार का प्रकाशन करती थी।
₹661 करोड़ की संपत्तियों पर कार्रवाई
अप्रैल महीने में ED ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब ₹661 करोड़ मूल्य की अचल संपत्तियां कब्जे में लेने का नोटिस जारी किया था। एजेंसी ने PMLA की धारा 8 और नियम 5(1) के तहत प्रॉपर्टी रजिस्ट्रार को आवश्यक दस्तावेज सौंपे थे और संपत्तियां खाली करने के निर्देश दिए थे। इससे पहले, नवंबर 2023 में ED ने AJL के ₹90.2 करोड़ के शेयरों को कुर्क किया था ताकि कथित अपराध से अर्जित संपत्ति को सुरक्षित रखा जा सके।
मुंबई स्थित हेराल्ड हाउस को लेकर निर्देश
ED ने मुंबई के बांद्रा स्थित हेराल्ड हाउस भवन की 7वीं, 8वीं और 9वीं मंजिल पर किराए पर काबिज जिंदल साउथ वेस्ट प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को नोटिस जारी किया। कंपनी को निर्देश दिए गए हैं कि वह मासिक किराया सीधे ED के निदेशक के खाते में जमा करे।
सोनिया और राहुल गांधी से हुई लंबी पूछताछ
इस मामले की जांच के दौरान
- राहुल गांधी से जून 2022 में 5 दिनों तक करीब 50 घंटे पूछताछ हुई थी।
- इसके बाद 21 जुलाई 2022 को सोनिया गांधी से 3 दिनों में करीब 12 घंटे पूछताछ की गई और उनसे 100 से अधिक सवाल पूछे गए थे।
नेशनल हेराल्ड केस की शुरुआत कैसे हुई?
इस मामले की शुरुआत 2012 में BJP नेता सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में दायर याचिका से हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने घाटे में चल रहे नेशनल हेराल्ड अखबार की संपत्तियों पर कब्जा करने के इरादे से यंग इंडियन लिमिटेड नाम की संस्था बनाई।
स्वामी का दावा है कि इसी संस्था के जरिए AJL का कथित रूप से अवैध अधिग्रहण किया गया, ताकि दिल्ली के बहादुर शाह जफर मार्ग स्थित करीब 2000 करोड़ रुपए मूल्य की हेराल्ड हाउस बिल्डिंग पर नियंत्रण पाया जा सके। आरोप यह भी है कि 2000 करोड़ की कंपनी को मात्र 50 लाख रुपए में अपने कब्जे में ले लिया गया, जो सीधे तौर पर धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितता का मामला बनता है।


