कफ सिरप से बच्चों की मौतों और गंभीर दुष्प्रभावों के मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने इसकी खुली बिक्री पर लगाम लगाने का बड़ा फैसला लिया है। अब अधिकांश कफ सिरप मेडिकल दुकानों पर डॉक्टर की लिखित पर्ची के बिना नहीं बेचे जा सकेंगे। दुकानदारों को हर प्रिस्क्रिप्शन का पूरा रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखना होगा। इसके साथ ही सिरप की गुणवत्ता जांच के नियमों को और अधिक सख्त किया जा रहा है।

औषध परामर्श समिति ने दी मंजूरी
सरकार की शीर्ष नियामक संस्था औषध परामर्श समिति ने कफ सिरप को उस श्रेणी से बाहर करने की मंजूरी दे दी है, जिसके तहत उसे लाइसेंस और निगरानी नियमों में छूट मिलती थी। इस बदलाव के बाद कफ सिरप की खरीद पर डॉक्टर की सलाह और पर्ची अनिवार्य हो जाएगी।
देश–विदेश में हुई घटनाओं से सरकार सतर्क
समिति के एक सदस्य के अनुसार यह निर्णय उन गंभीर मामलों के बाद लिया गया है, जिनमें पिछले तीन वर्षों में भारत से निर्यात किए गए कई कफ सिरप में डाई-एथिलीन ग्लाइकोल (डीईजी) और ईथिलीन ग्लाइकोल (ईजी) जैसे जहरीले तत्व पाए गए थे। इसके कारण गाम्बिया, उज्बेकिस्तान और कैमरून में बच्चों की मौतें हुईं। हाल ही में मध्य प्रदेश में भी कफ सिरप से जुड़ी मौतों की घटनाएं सामने आई हैं।
खुद इलाज से बचने की अपील
समिति का कहना है कि खांसी-जुकाम जैसी साधारण बीमारी में भी लोग बिना डॉक्टर से पूछे दवाइयां ले लेते हैं, जो खतरनाक साबित हो सकता है। सरकार का लक्ष्य है कि लोग स्वयं दवा लेने की आदत छोड़कर चिकित्सकीय परामर्श लें।
बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। नई व्यवस्था से गलत दवा सेवन और गंभीर दुष्प्रभावों को रोका जा सकेगा। उन्होंने यह भी बताया कि हाल में कफ सिरप का नशे के लिए दुरुपयोग किए जाने के मामले भी सामने आए हैं, जिसे रोकना बेहद जरूरी है।


