रात की रोशनी खराब कर रही आपकी नींद, जानें इसका असर

क्या आपको भी अंधेरे में सोने में दिक्कत होती है? कई लोग रात में हल्का या तेज़ प्रकाश जलाकर ही सो पाते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स की मानें तो यह आदत सेहत के लिए ठीक नहीं है। शोध बताते हैं कि रोशनी में सोने से न सिर्फ आपके शरीर की प्राकृतिक नींद चक्र पर असर पड़ता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित हो सकता है।
1. नींद की गुणवत्ता हो जाती है खराब
विशेषज्ञों का कहना है कि रोशनी में सोने पर दिमाग पूरी तरह रिलैक्स नहीं हो पाता। ब्रेन को लगातार यह संकेत मिलता रहता है कि अभी रात नहीं हुई है, जिससे वह गहरी नींद के चरण में प्रवेश नहीं कर पाता। यही वजह है कि लोग पर्याप्त नींद लेने के बावजूद सुबह थकान या सुस्ती महसूस करते हैं।
2. वजन बढ़ने का भी बढ़ता है जोखिम
पर्याप्त और गहरी नींद न पूरी होना मोटापे की एक बड़ी वजह बन सकता है। जब नींद बार-बार टूटती है या पूरी नहीं होती, तब बॉडी के हार्मोनल बैलेंस पर असर पड़ता है, और भूख बढ़ाने वाले हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं। इसलिए रोशनी में सोना अप्रत्यक्ष रूप से वजन बढ़ाने में भी भूमिका निभा सकता है। अगर आपको अंधेरे से डर लगता है, तो शुरुआत में हल्की नाइट लाइट का इस्तेमाल किया जा सकता है। बाद में धीरे-धीरे इसकी आदत छोड़कर पूरी तरह डार्क रूम में सोना बेहतर रहेगा।
3. मूड पर होता है बुरा प्रभाव
नींद के दौरान तेज़ रोशनी या गैजेट्स की स्क्रीन मनोदशा पर भी असर डालती है। यह नींद के पैटर्न को बिगाड़कर चिड़चिड़ेपन, तनाव और मूड स्विंग्स जैसी समस्याएँ बढ़ा सकती है। इसी कारण सोने से पहले टीवी, मोबाइल और लैपटॉप से दूरी बनाने की सलाह दी जाती है।
निष्कर्ष
बेहतर नींद, बेहतर मूड और स्वस्थ शरीर के लिए रात में पूरी तरह अंधेरा रखना आदर्श माना जाता है। अगर आप भी रोशनी में सोने की आदत रखते हैं, तो धीरे-धीरे इसे छोड़ने की कोशिश करें—आप खुद फर्क महसूस करेंगे।
टिप्पणी:- इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। सुलहकुल किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।


