पति की जिम्मेदारी से इंकार नहीं: लखनऊ पीठ ने कहा, पत्नी का गुजारा हर हाल में दे

लखनऊ में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने पारिवारिक विवाद से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि पत्नी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से पति केवल इसलिए नहीं बच सकता कि वह बेरोजगार है। न्यायालय के अनुसार, पति चाहें मजदूरी करके ही सही, अपनी पत्नी का गुजारा सुनिश्चित करने के लिए बाध्य है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की एकल पीठ ने उस निगरानी याचिका पर सुनाते हुए दिया, जिसमें पति ने फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए अंतरिम भरण-पोषण के आदेश को चुनौती दी थी। पति की दलील थी कि उसके पास रोजगार नहीं है, इसलिए वह भरण-पोषण देने में सक्षम नहीं है।
मामले के अनुसार, पत्नी ने फैमिली कोर्ट में आवेदन देकर कहा था कि उसकी शादी 28 नवंबर 2013 को जालंधर में हुई थी, लेकिन विवाह के बाद उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा। परेशान होकर वह 2021 में अपने भाई के साथ लखनऊ आ गई। इसके बाद उसने गुजारा भत्ता मांगते हुए अर्जी दाखिल की।
फैमिली कोर्ट ने यह मानते हुए कि पति सक्षम व्यक्ति है, कहा था कि अगर वह दैनिक मजदूरी भी करे तो आसानी से लगभग 12,500 रुपये प्रतिमाह कमा सकता है। इसी आधार पर कोर्ट ने पत्नी को 2,500 रुपये मासिक अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया था।
हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को सही ठहराया और कहा कि आदेश में न कोई कानूनी खामी है और न ही कोई अनियमितता। परिणामस्वरूप, पति की निगरानी याचिका खारिज कर दी गई।


