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10 करोड़ की लोन ठगी: दो सगे भाइयों ने 100 से ज्यादा लोगों को बनाया शिकार, पुलिसकर्मी भी शामिल

किस्त जमा करने का लालच देकर 10 करोड़ की ठगी, कैंट पुलिस ने दो आरोपी भाइयों को पकड़ा
आरोपी दीपक गुप्ता और गौरव गुप्ता ।

वाराणसी में लोन उपलब्ध कराने और किश्तें जमा करने के नाम पर एक बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है। लगभग 10 करोड़ रुपये से अधिक की इस ठगी को अंजाम देने के आरोप में अशोक विहार कॉलोनी, पहड़िया के रहने वाले **दो सगे भाई—दीपक गुप्ता और गौरव गुप्ता—**को कैंट पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार किया।
यह दोनों बीते कई वर्षों से वाराणसी और आसपास के जिलों के लोगों को अलग-अलग स्कीम और आकर्षक ऑफरों का लालच देकर फांसते आ रहे थे। इनके शिकार हुए लोगों में शहर के 100 से ज्यादा लोग हैं और चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें करीब 70% पुलिसकर्मी शामिल हैं। हेड कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर और यहाँ तक कि सीओ रैंक के अधिकारी भी इनके झांसे में आ चुके हैं।

कैसे करते थे ठगी?

करीब चार साल पहले दोनों भाइयों ने सारनाथ थाना क्षेत्र के सारंगतालाब इलाके में एक ऑफिस खोला। शुरूआती महीनों में यह लोग ग्राहकों को कुछ लाभ पहुंचाकर भरोसा जीतते थे। इसके बाद यह योजना पेश करते थे कि किसी की आईडी पर लोन पास कराया जाएगा और लोन की आधी रकम स्वयं जमा करने का दावा करते थे।
पुलिसकर्मी और अन्य लोग इस स्कीम में निवेश के उद्देश्य से अपने रिश्तेदारों के नाम पर 5 से 25 लाख रुपये तक के लोन लेने लगे। लगभग छह महीनों तक दोनों भाई किश्तों का भुगतान करते रहे ताकि विश्वास कायम रहे। लेकिन बाद में उन्होंने किश्तें जमा करना बंद कर दिया और बड़ी रकम लेकर फरार हो गए।

पुलिसकर्मी सबसे ज्यादा प्रभावित

जब बैंक और फाइनेंस कंपनियों की ओर से भुगतान के लिए दबाव बढ़ा, तब पीड़ितों को ठगी का एहसास हुआ। कई पुलिसकर्मी अभी भी बदनामी के डर से शिकायत दर्ज कराने से बच रहे हैं। दोनों भाइयों पर इससे पहले भी ठगी के मामले कैंट और कोतवाली थानों में दर्ज हैं।

ठगी का दायरा और बड़ा

पुलिसकर्मियों के अलावा पहड़िया मंडी के आढ़ती, छोटे व्यापारी और अन्य लोग भी इस जालसाजी के शिकार बने हैं। अनुमान है कि कुल ठगी की रकम 10 करोड़ से भी अधिक हो सकती है क्योंकि बड़े पैमाने पर लोगों से लोन के नाम पर राशि बटोरी गई।

अधिकारियों का बयान

डीसीपी क्राइम सरवणन टी. ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ दो केस दर्ज हो चुके हैं और जांच के दौरान और भी पीड़ित सामने आ सकते हैं। इस पूरे नेटवर्क में जो भी शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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