समान वेतन से नाइट शिफ्ट तक: नई श्रम संहिताएँ महिलाओं के लिए ऐतिहासिक साबित

हाल ही में लागू की गई चार नई श्रम संहिताओं ने भारत में महिलाओं के लिए कार्यस्थल को अधिक सुरक्षित, न्यायपूर्ण और समावेशी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है। सरकार के अनुसार, पिछले शुक्रवार से प्रभावी इन संहिताओं में कई महत्वपूर्ण बदलाव शामिल हैं, जिनका उद्देश्य महिलाओं को सभी क्षेत्रों में समान अवसर प्रदान करना है।
नई संहिताएँ न केवल लैंगिक भेदभाव पर सख्त रोक लगाती हैं बल्कि महिलाओं को समान काम के लिए समान वेतन दिलाने की भी गारंटी देती हैं। इसके साथ ही, अब महिलाएँ भूमिगत खनन, भारी मशीनरी के संचालन जैसे पहले प्रतिबंधित क्षेत्रों में भी कार्य कर सकेंगी। सुरक्षा उपायों और लिखित सहमति के आधार पर उन्हें रात्रि पाली में काम करने की भी अनुमति दी गई है।
महिलाओं की नौकरी में निरंतरता और भागीदारी बढ़ाने के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ जैसी लचीली व्यवस्थाओं को भी संहिताओं में शामिल किया गया है। इससे महिलाओं के लिए बेहतर आय अर्जित करने और उच्च वेतन वाली नौकरियों तक पहुँच आसान होगी। शिकायत निवारण समितियों में महिला सदस्यों की अनिवार्य भागीदारी सुनिश्चित की गई है, जिससे कार्यस्थल पर उनकी आवाज़ और मज़बूत होगी।
सरकार का कहना है कि ये सुधार भारत के श्रम क्षेत्र में दूरगामी बदलाव लाएँगे और भविष्य के कार्यबल को आधुनिक, समानतापूर्ण और मज़बूत बनाएँगे। वित्त मंत्रालय ने इन 2025 के श्रम सुधारों को महिलाओं की कार्यस्थल समानता की दिशा में एक निर्णायक पहल बताया है।
इस ऐतिहासिक निर्णय के साथ वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संहिता 2020 अब लागू हो चुकी हैं, जो मिलकर 29 पुराने श्रम कानूनों को एकीकृत करती हैं। सरकार का कहना है कि ये कदम श्रमिकों के हितों की रक्षा करते हुए उद्योगों के लिए अधिक सरल, पारदर्शी और भविष्य-उन्मुख श्रम ढाँचा तैयार करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इन सुधारों की सराहना करते हुए कहा कि ये कदम भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखला में और मज़बूती देंगे, अनुपालन प्रक्रिया को आसान बनाएँगे और महिला श्रमिकों की भूमिका को सशक्त करेंगे।


