सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में बढ़ती आवारा पशुओं और कुत्तों की समस्या पर बड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की तीन सदस्यीय पीठ ने अपने आदेश को तीन हिस्सों में बाँटते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कड़े निर्देश दिए हैं।

1. सभी राज्यों से रिपोर्ट मांगी गई
कोर्ट ने कहा कि अमिकस क्यूरी द्वारा दी गई रिपोर्ट को आदेश का हिस्सा माना जाएगा। सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अगली सुनवाई से पहले हलफनामा दाखिल करें, जिसमें बताया जाए कि रिपोर्ट में बताई गई कमियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने साफ किया कि अगर किसी राज्य ने लापरवाही दिखाई, तो उसे बहुत गंभीरता से लिया जाएगा और जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई होगी।
2. हाईवे और सड़कों से आवारा जानवर हटाए जाएं
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट के पुराने निर्देशों को फिर से लागू करते हुए कहा कि सभी राज्यों के नोडल अधिकारी सुनिश्चित करें कि राष्ट्रीय राजमार्गों, सड़कों और एक्सप्रेसवे से गाय-भैंस जैसे मवेशियों सहित सभी आवारा पशुओं को हटाया जाए। कोर्ट ने कहा कि राज्यों को मिलकर एक संयुक्त अभियान चलाना होगा ताकि सड़क दुर्घटनाओं और ट्रैफिक बाधाओं को रोका जा सके। साथ ही, पकड़े गए पशुओं की देखभाल, भोजन और शेल्टर की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी।
3. सरकारी संस्थानों की सुरक्षा और फेंसिंग जरूरी
बढ़ती कुत्तों के काटने की घटनाओं को देखते हुए कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों को दो हफ्तों में अपने सरकारी संस्थानों की पहचान करने का आदेश दिया है — जैसे जिला अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, खेल परिसर आदि। इन सभी जगहों पर फेंसिंग (बाड़) लगाई जाए ताकि आवारा कुत्ते या जानवर अंदर न घुस सकें। यह काम 8 हफ्तों के भीतर पूरा किया जाना चाहिए। हर संस्थान को एक नोडल अधिकारी नियुक्त करना होगा जो परिसर की निगरानी करेगा। स्थानीय नगर निकाय नियमित रूप से निरीक्षण करेंगे, ताकि किसी जगह आवारा कुत्तों का ठिकाना न बन पाए। जहां भी कुत्ते या अन्य आवारा जानवर मिलें, उन्हें शेल्टर में ले जाकर नसबंदी कराई जाए — लेकिन उन्हें दोबारा उसी जगह पर छोड़ना सख्त मना होगा।
8 हफ्तों में स्टेटस रिपोर्ट जरूरी
सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को आदेशों के पालन की निगरानी करनी होगी और 8 हफ्तों के भीतर सुप्रीम कोर्ट में विस्तृत रिपोर्ट जमा करनी होगी। अदालत ने चेतावनी दी है कि आदेशों की अनदेखी होने पर व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाएगी।


