भागकर नहीं, समाज के सामने शादी चाहती थी अंशु — ज़िद बनी मौत की वजह
इज़्ज़त के डर ने बना दिया पिता को कातिल, बेटी की गला दबाकर हत्या

अंशु भागकर शादी नहीं करना चाहती थी। वह चाहती थी कि परिवार और समाज की सहमति से अपने प्रेमी से विवाह करे। लेकिन यही बात उसके लिए जानलेवा साबित हुई। पिता को डर था कि रिश्तेदारों में बदनामी होगी और इसी डर ने एक पिता को कातिल बना दिया। पुलिस जांच में सामने आया है कि अंशु के पिता रणवीर सिंह पहले बेटी की शादी के लिए राज़ी थे। लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद रिश्तेदारों की बातें उन्हें चुभने लगीं। उन्होंने बेटी पर दबाव बनाया कि वह घर से भागकर शादी कर ले, ताकि जिम्मेदारी खत्म हो जाए। अंशु ने इसका विरोध किया और परिवार के खिलाफ खड़ी हो गई।
घर में रोज़ का तनाव बना मौत की वजह
डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा के अनुसार, घर में आए दिन झगड़े होने लगे थे। पिता ने अंशु का मोबाइल छीन लिया, लेकिन वह सहेली के जरिए प्रेमी अनुराग से संपर्क में रहती थी। 24 अक्तूबर को अंशु ने अनुराग को एक वीडियो भेजकर अपनी जान को खतरा बताया। यह वीडियो रिश्तेदारों तक पहुंच गया और मामला और बिगड़ गया।
मां-बाप बने हत्यारे
25 अक्तूबर की सुबह पिता-पुत्री के बीच विवाद इतना बढ़ा कि रणवीर सिंह ने अंशु के गले में दुपट्टा डालकर गला दबा दिया। वह बचने के लिए छटपटाती रही। मां ने उसके पैरों को पकड़ लिया। जब तक छोटा भाई मदद के लिए पहुंचता, अंशु की सांसें थम चुकी थीं।
शव ठिकाने लगाने की साजिश
हत्या के बाद शव को कार की डिक्की में रखकर इटावा ले जाया गया। योजना वाराणसी में शव फेंकने की थी, लेकिन बाद में यमुना नदी में शव को ठिकाने लगा दिया गया। टोल प्लाज़ा के कैमरों में कार कैद हो गई, जिससे पुलिस को अहम सुराग मिला।
सबूत मिटाने की कोशिश
आरोपी पिता और भाई ने घर के सीसीटीवी फुटेज डिलीट कर दिए। प्रेमी अनुराग की ओर से कोर्ट में याचिका दायर होने की भनक लगते ही गुमशुदगी दर्ज कराई गई और जानबूझकर प्रेम संबंध की जानकारी छिपाई गई, ताकि उसे फंसाया जा सके।
50 दिन बाद खुला राज़
पुलिस ने इटावा में यमुना नदी में तलाश शुरू की। पहले कुर्ता और बाल मिले, जिन्हें अनुराग ने पहचान लिया। बाद में खोपड़ी, जबड़ा, हाथ और दुपट्टा बरामद हुआ। अंशु की तस्वीरें देखकर पुलिस का शक यकीन में बदला। एसीपी सैंया डॉ. सुकन्या शर्मा के मुताबिक, सभी अवशेषों को फॉरेंसिक जांच और डीएनए परीक्षण के लिए भेजा गया है। यह मामला इस बात का सबूत है कि कैसे सामाजिक दबाव और झूठी इज़्ज़त की सोच ने एक बेटी की जिंदगी छीन ली।


