सहारनपुर हादसा: जिंदगी और मौत के बीच थमी चीखें

सहारनपुर के दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे पर हुआ शुक्रवार का दर्दनाक हादसा हर किसी को झकझोर देने वाला रहा। जब ग्रामीण कार पर गिरी बजरी हटाने में जुटे थे, तब भीतर से लोगों के कराहने की हल्की आवाजें सुनाई दे रही थीं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो कोई मदद की गुहार लगा रहा हो, लेकिन जब तक मलबा पूरी तरह हटाया गया – सब कुछ शांत हो चुका था। बताया जा रहा है कि उस समय तक कार चला रहे संदीप की सांसें चल रही थीं।
शादी से लौट रही कार बन गई मौत का इंतजार
हादसे का शिकार हुई कार संदीप के बड़े भाई प्रदीप की शादी में आई थी और उसी वाहन से परिवार मामा के यहां अंतिम संस्कार में शामिल होने जा रहा था। सुबह करीब सवा नौ बजे जैसे ही कार सोना सैयद माजरा गांव के अंडरपास के पास सर्विस रोड पर पहुंची, देहरादून की ओर से तेज रफ्तार में आ रहा ओवरलोड डंपर अनियंत्रित होकर वाहन के ऊपर पलट गया। बजरी की चपेट में आने से कार पूरी तरह दब गई।

कोई बाहर नहीं निकल सका
हादसे में वाहन सवार सातों लोगों को निकलने का कोई मौका नहीं मिला। ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन बजरी इतनी अधिक थी कि जेसीबी बुलानी पड़ी। करीब एक घंटे बाद सभी शव बाहर निकाले जा सके।
सात जिंदगियां एक पल में खत्म
मृतकों में मेडिकल स्टोर संचालक संदीप सैनी (25), उनकी मां रानी (55), बहन जूली (27), जीजा शेखर (28), भांजा अनिरुद्ध (2), मौसेरे भाई विपिन (22) और प्रदीप के ससुर उमेश सिंह (55) शामिल हैं। सभी हरिद्वार की ओर जा रहे थे।
गुस्सा सड़कों पर उतरा, तीन घंटे तक लगा जाम
हादसे के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। चमारीखेड़ा टोल प्लाजा पर एक्सप्रेसवे को जाम कर दिया गया, जिससे करीब साढ़े तीन घंटे तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। अफसरों और नेताओं के वाहन भी जाम में फंसे रहे। पुलिस को हल्का बल प्रयोग कर रास्ता खुलवाना पड़ा।
प्रशासन पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने हादसे के लिए एनएचएआई और जिला प्रशासन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया। आरोप लगा कि एक्सप्रेसवे पर निर्माण पूरा होने के बावजूद कई ओवरब्रिज और अंडरपास अब तक पूरी तरह चालू नहीं किए गए हैं। साथ ही भारी वाहनों पर नियंत्रण न होने से ओवरलोड डंपर मौत बनकर दौड़ रहे हैं।
मौके पर पहुंचे बड़े अधिकारी
घटना की जानकारी मिलते ही मंडलायुक्त डॉ. रुपेश कुमार, डीआईजी अभिषेक सिंह, डीएम मनीष बंसल और एसएसपी आशीष तिवारी मौके पर पहुंचे। डीएम ने एनएचएआई को निर्देश दिए कि अंडरपास में तुरंत रोशनी की व्यवस्था की जाए और दोनों सर्विस रोड पर ब्रेकर लगाकर वाहनों की रफ्तार नियंत्रित की जाए।

पूरे जिले में हाई अलर्ट
स्थिति को देखते हुए घटनास्थल से लेकर जिला अस्पताल तक भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई। सीएम ने भी हादसे पर संज्ञान लेते हुए अधिकारियों से पल-पल की रिपोर्ट मांगी और उचित कार्रवाई के निर्देश दिए।
उजड़ा पूरा परिवार
हादसे में अपने पूरे परिवार को खोने वाले महेंद्र सैनी सूने बैठे नजर आए। लोगों ने जब ढांढस बंधाया तो वे फूट-फूटकर रो पड़े। बोले —
“सुबह घर से सब हंसते हुए निकले थे, क्या पता था वही आखिरी मुलाकात होगी। अब तो मेरी पूरी दुनिया उजड़ गई।”
मुआवजे का आश्वासन
ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार के लिए सरकारी मदद और नौकरी की मांग की। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री राहत कोष से मुआवजा दिए जाने और वाहन बीमा के लाभ दिलाने का आश्वासन देकर लोगों को शांत कराया।
जनप्रतिनिधियों ने दी सांत्वना
सांसद इमरान मसूद, विधायक आशु मलिक, एमएलसी शाहनवाज अली सहित कई नेता मौके पर पहुंचे और परिवार से मुलाकात कर हरसंभव मदद का भरोसा दिया।
साल का सबसे भयावह हादसा
गागलहेड़ी क्षेत्र में हुआ यह हादसा 2025 में सहारनपुर जिले की सबसे बड़ी सड़क दुर्घटना माना जा रहा है, जिसने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है।


