तिरुवनन्तपुरम। केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला अय्यप्पा मंदिर में सोने की कथित लूट के बाद अब घी प्रसाद से जुड़ा एक बड़ा आर्थिक घोटाला सामने आया है। आरोप है कि केवल दो महीनों में घी की बिक्री के नाम पर लाखों रुपये का गबन किया गया। इस मामले को गंभीर मानते हुए केरल हाईकोर्ट ने राज्य विजिलेंस एवं एंटी करप्शन ब्यूरो को जांच के निर्देश दिए हैं।
कैसे सामने आया मामला
मंदिर प्रशासन की आंतरिक ऑडिट और विजिलेंस विभाग की प्रारंभिक जांच में इस अनियमितता का खुलासा हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) के अधीन घी प्रसाद की बिक्री में भारी वित्तीय गड़बड़ी पाई गई। मामले में काउंटर इंचार्ज सुनील पोट्टी को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।
घी प्रसाद से होती है बड़ी कमाई
सबरीमाला आने वाले श्रद्धालु भगवान अय्यप्पा को नारियल और घी अर्पित करते हैं। यही घी बाद में “आथिया शिष्टम” नाम से प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं को बेचा जाता है, जो देवस्वोम बोर्ड की आय का एक अहम स्रोत है। TDB द्वारा 100 मिलीलीटर के पैकेट में घी पैक किया जाता है, जिसकी कीमत 100 रुपये तय है। पैकिंग का काम ठेकेदार करता है, जिसे प्रति पैकेट 20 पैसे का भुगतान किया जाता है।
गड़बड़ी का पूरा हिसाब
जांच में सामने आया कि 17 नवंबर 2025 से 26 दिसंबर 2025 के बीच ठेकेदार ने कुल 3,52,050 घी पैकेट तैयार किए। इनमें से लगभग 89,300 पैकेट विभिन्न दिनों में मरामाथ बिल्डिंग स्थित काउंटर से बिक्री के लिए निकाले गए। इनमें 143 पैकेट खराब पाए गए और 27 दिसंबर तक काउंटर में केवल 28 पैकेट शेष थे। इस हिसाब से 89,129 पैकेट बिकने चाहिए थे, लेकिन काउंटर कर्मचारियों ने केवल 75,450 पैकेट की राशि ही जमा की।
13.67 लाख रुपये का हिसाब गायब
रिकॉर्ड के अनुसार 13,679 पैकेट की बिक्री से प्राप्त 13,67,900 रुपये बोर्ड के खाते में जमा नहीं किए गए। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि इतनी बड़ी रकम का कम समय में गायब होना महज़ लेखा-जोखा की चूक नहीं हो सकती।
विजिलेंस जांच के आदेश
हाईकोर्ट ने मंदिर विजिलेंस कमिश्नर की रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए राज्य विजिलेंस एवं एंटी करप्शन विभाग को एक महीने के भीतर विस्तृत जांच कर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि मामले की गहराई से जांच जरूरी है ताकि जिम्मेदार लोगों की पहचान हो सके।


