कमला नेहरू कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय संस्कृत विदुषी सम्मेलन 2026, नारी चेतना और संस्कृति पर मंथन

नई दिल्ली। राजधानी के कमला नेहरू कॉलेज के सभागार में मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय संस्कृत विदुषी सम्मेलन–2026 का गरिमामय आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम संस्कृत संस्कृति विकास संस्थान न्यास (दिल्ली प्रान्त) और कॉलेज के संस्कृत विभाग के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। सम्मेलन का केंद्रीय विषय “राष्ट्रीय संचेतना एवं युग-युगीन नारी” रहा, जिसके माध्यम से भारतीय इतिहास और संस्कृति के विभिन्न कालखंडों में नारी की भूमिका पर गहन विमर्श किया गया।
संस्कृति, विरासत और नारी सम्मान का संदेश
सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि राजस्थान के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने दीप प्रज्वलन के साथ किया। अपने संबोधन में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकास के साथ विरासत” के विचार को रेखांकित करते हुए कहा कि आधुनिकता के दौर में भी सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ाव अनिवार्य है।
नारी शक्ति पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में स्त्री का स्थान सदैव सर्वोच्च रहा है—यही कारण है कि हमारी सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों में ‘सीता-राम’ और ‘राधा-कृष्ण’ जैसे संबोधन प्रचलित हैं। उन्होंने विधानसभाओं में महिलाओं को दिए गए आरक्षण का उल्लेख करते हुए इसे नारी सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।
विदुषियों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान संस्कृत के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली सात विदुषियों को विशेष सम्मान से अलंकृत किया गया। इनमें प्रो. मीरा द्विवेदी, प्रो. शशि प्रभा कुमार, प्रो. हरप्रीत कौर, डॉ. धर्मा, डॉ. चारू कालरा, आचार्या अन्नपूर्णा और आचार्या नंदिता शामिल रहीं।
शिक्षाविदों के विचार
संस्था के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए प्रो. विजय गर्ग ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को केवल संस्कृति से परिचित कराना ही नहीं, बल्कि उसे जीवन में आत्मसात कराना भी आवश्यक है। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. रंजन त्रिपाठी ने भारतीय नारी की ऐतिहासिक और सामाजिक भूमिका पर सारगर्भित विचार रखे।
अगले सम्मेलन की घोषणा
इस अवसर पर माता सुंदरी कॉलेज की प्राचार्या प्रो. हरप्रीत कौर ने घोषणा की कि अगले वर्ष अंतरराष्ट्रीय संस्कृत विदुषी सम्मेलन उनके कॉलेज में आयोजित किया जाएगा। इस पहल के लिए गृह राज्य मंत्री ने उन्हें विशेष रूप से धन्यवाद दिया।
आयोजन में प्रमुख सहभागिता
अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. रंजन त्रिपाठी, सारस्वत अतिथि के रूप में प्रो. दीप्ति त्रिपाठी तथा सत्राध्यक्ष के रूप में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रो. सुधीर आर्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम की सफलता में अध्यक्ष डॉ. अंजू सेठ, समन्वयक प्रो. विजय गर्ग, संयोजक प्रो. सुषमा चौधरी और सूत्रधार सुनील शर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जबकि संचालन डॉ. कामना विमल, डॉ. मोनिका मिश्रा और डॉ. रितिका ने किया।


