
कीर्ति पाल सिंह टाइगर , जिला अध्यक्ष, राष्ट्रवादी शिक्षक महासंघ ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि शिक्षकों के लिए जारी समायोजन आदेश स्वैच्छिक और वैकल्पिक बताया गया था, लेकिन व्यवहार में बिना सहमति लिए उन्हें न्याय पंचायत स्तर पर जबरन समायोजित कर दिया गया।
शिक्षक नेताओं का आरोप है कि इस प्रक्रिया में आरक्षण नियमों की अनदेखी की गई। इतना ही नहीं, दिव्यांग शिक्षकों को भी उनकी परिस्थितियों की परवाह किए बिना दूरस्थ विद्यालयों में तैनात कर दिया गया। कई मामलों में शिक्षकों के नाम समायोजन सूची में शामिल न होने के बावजूद, बिना किसी पूर्व सूचना के स्थानांतरण आदेश जारी कर दिए गए।
विद्यालयों में असंतुलित शिक्षक-छात्र अनुपात भी सवालों के घेरे में है। जैतपुर कलां स्थित प्राथमिक विद्यालय चंद्रपुर में केवल 12 छात्र होने के बावजूद तीन शिक्षक कार्यरत हैं, लेकिन यहां से किसी का समायोजन नहीं किया गया। इसके उलट, कंपोजिट विद्यालय महुआ जैतपुर में तीन में से दो शिक्षकों को हटाकर विद्यालय को एकल शिक्षक के भरोसे छोड़ दिया गया।
बिचपुरी क्षेत्र के कंपोजिट विद्यालय दहतोरा में 184 छात्र पंजीकृत हैं, इसके बावजूद चार शिक्षकों का समायोजन कर दिया गया, जिससे आठ कक्षाओं की जिम्मेदारी अब केवल तीन शिक्षकों पर आ गई है। बरौली अहीर क्षेत्र में एक दिव्यांग महिला शिक्षक को प्राथमिक विद्यालय चमरौली से हटाकर न्याय पंचायत बदलते हुए लगभग 10 किलोमीटर दूर भेज दिया गया, जिसे लेकर खासा रोष है।
इन सभी मामलों के विरोध में गुरुवार को पीड़ित शिक्षकों ने बीएसए कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने समायोजन नियमावली के विभिन्न प्रावधानों का हवाला देते हुए निष्पक्ष जांच और तत्काल सुधार की मांग की। प्रदर्शन में अनिल शर्मा, विजय सिंह, देवेंद्र चाहर, अजय चौधरी, अशोक जादौन, मोनिका सिंह, सुनील कुमार, धीरज प्रताप, प्रेरणा दीक्षित, शबनम खान, मीणा भारती, प्रतिभा सहित कई शिक्षक उपस्थित रहे।


