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वोडाफोन आइडिया को बड़ी राहत, ₹87,695 करोड़ का AGR बकाया किया गया फ्रीज

सरकार का बड़ा दांव: वोडाफोन आइडिया को दशक भर की मोहलत, AGR भुगतान 2041 तक टला

कर्ज के दबाव से जूझ रही टेलीकॉम कंपनी Vodafone Idea को केंद्र सरकार ने बड़ी राहत दी है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय कैबिनेट ने एक विशेष पैकेज को मंजूरी देते हुए कंपनी के एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) से जुड़े बकाये को ₹87,695 करोड़ पर स्थिर (फ्रीज) कर दिया है। सरकार के इस फैसले को टेलीकॉम सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने और कंपनी में सरकार की हिस्सेदारी के आर्थिक मूल्य को सुरक्षित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

2032 से शुरू होगा भुगतान, 2041 तक चलेगी प्रक्रिया

कैबिनेट के फैसले के तहत वोडाफोन आइडिया को इस बकाया राशि का तत्काल भुगतान नहीं करना होगा। ₹87,695 करोड़ की यह देनदारी अब वित्त वर्ष 2031-32 से लेकर 2040-41 के बीच किस्तों में चुकाई जाएगी। बकाये की गणना 31 दिसंबर 2025 की स्थिति के आधार पर फ्रीज की गई है। हालांकि, दूरसंचार विभाग (DoT) इस राशि की दोबारा जांच करेगा ताकि आंकड़ों की सटीकता सुनिश्चित की जा सके।

पुराने वर्षों के लिए कोई राहत नहीं

राहत पैकेज के बावजूद कंपनी को कुछ पुराने दायित्वों से छूट नहीं मिली है। वित्त वर्ष 2017-18 और 2018-19 से जुड़े AGR बकाये के भुगतान कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इन वर्षों की राशि कंपनी को पहले से तय शेड्यूल के मुताबिक 2025-26 से 2030-31 के बीच चुकानी होगी।

डुओपॉली रोकने की रणनीति

फिलहाल सरकार वोडाफोन आइडिया में करीब 49% हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ी शेयरधारक है। जानकारों का मानना है कि यह फैसला केवल एक कंपनी को बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद भारतीय टेलीकॉम बाजार को केवल दो बड़ी कंपनियों के वर्चस्व (डुओपॉली) में जाने से रोकना भी है। इस राहत से कंपनी को 5G सेवाओं के विस्तार और नेटवर्क सुधार के लिए पूंजी जुटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

आगे की राह अब निवेश और ARPU पर निर्भर

काफी समय से वित्तीय संकट और ग्राहकों की घटती संख्या से जूझ रही वोडाफोन आइडिया के लिए यह फैसला कैश फ्लो के लिहाज से राहत भरा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि भुगतान में मिली अतिरिक्त मोहलत से कंपनी को संचालन सुधारने का मौका मिलेगा। हालांकि, दीर्घकालिक स्थिरता इस बात पर टिकी होगी कि कंपनी नए निवेशकों को कितनी जल्दी आकर्षित कर पाती है और प्रति ग्राहक औसत राजस्व (ARPU) में कितना इजाफा कर पाती है।

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