अमेरिका के दबाव में वेनेजुएला, तेल साझेदारी को लेकर टकराव
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला की नई अंतरिम सरकार के सामने कड़े विकल्प रख दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर वेनेजुएला अपने तेल उत्पादन को बढ़ाना चाहता है तो उसे चीन, रूस, ईरान और क्यूबा जैसे देशों से अपने आर्थिक रिश्ते तोड़ने होंगे। इसके साथ ही अमेरिका चाहता है कि वेनेजुएला तेल क्षेत्र में केवल उसी के साथ साझेदारी करे और कच्चे तेल की बिक्री में अमेरिकी कंपनियों को प्राथमिकता दे।

अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में डेल्सी रोड्रिग्ज
पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के अमेरिका लाए जाने के बाद डेल्सी रोड्रिग्ज ने अंतरिम राष्ट्रपति के तौर पर जिम्मेदारी संभाली है। इस बीच ट्रंप ने यह दावा भी किया है कि वेनेजुएला की सत्ता पर अब अमेरिका का प्रभाव है, जिससे देश की राजनीति और ज्यादा अस्थिर हो गई है।
तेल के बदले शर्तें
सूत्रों के हवाले से ABC News ने बताया कि ट्रंप प्रशासन साफ तौर पर कह चुका है—पहले विदेशी सहयोगियों को बाहर करना होगा, उसके बाद ही तेल उत्पादन बढ़ाने की अनुमति मिलेगी। खास तौर पर चीन, जो लंबे समय से वेनेजुएला का करीबी साझेदार और सबसे बड़ा तेल खरीदार रहा है, उसे सबसे बड़ा झटका लग सकता है।
भंडारण की कमी और बढ़ता संकट
एक निजी ब्रीफिंग में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सांसदों को बताया कि वेनेजुएला की स्थिति कमजोर है क्योंकि उसके तेल टैंकर पहले से भरे हुए हैं। Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी नाकेबंदी के चलते वेनेजुएला को भंडारण की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिस वजह से उसे कई तेल कुएं बंद करने पड़े हैं।
दिवालिया होने की कगार पर देश
अमेरिकी सीनेट की आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के चेयरमैन रोजर विकर का कहना है कि अमेरिका की रणनीति वेनेजुएला के तेल पर नियंत्रण तक सीमित है और इसके लिए सैन्य हस्तक्षेप जरूरी नहीं होगा। अमेरिकी आकलनों के मुताबिक, अगर वेनेजुएला अपने तेल भंडार को जल्द नहीं बेच पाया तो कुछ ही हफ्तों में वह आर्थिक रूप से दिवालिया हो सकता है।


