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रूस से तेल खरीद पर अमेरिका के दबाव के बीच भारत को पोलैंड का समर्थन, यूरोप के साथ बढ़ी कूटनीतिक सक्रियता

रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारत और अमेरिका के रिश्तों में बढ़ते तनाव के बीच पोलैंड ने खुलकर भारत का समर्थन किया है। वॉशिंगटन जहां नई दिल्ली पर भारी टैरिफ लगाने की चेतावनी दे रहा है, वहीं यूरोप के भीतर भारत के कदमों को संतुलित और जिम्मेदार माना जा रहा है। पेरिस में वीमर ट्रायंगल समूह के साथ भारत की पहली बैठक के बाद पोलैंड के विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की ने कहा कि भारत ने रूसी तेल आयात में कमी शुरू कर दी है, जो एक सकारात्मक संकेत है। उनके मुताबिक, रूस से तेल की खरीद यूक्रेन युद्ध में मॉस्को की सैन्य क्षमता को मजबूत करती है और इसमें कटौती अहम है।

पोलैंड का बयान क्यों अहम?

सिकोरस्की ने विदेश मंत्री एस जयशंकर की मौजूदगी में कहा कि भारत द्वारा रूसी तेल आयात घटाना सही दिशा में कदम है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका भारत पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की संभावना पर विचार कर रहा है।

यूरोप के साथ रिश्ते मजबूत करने पर जोर

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूरोप को वैश्विक राजनीति का अहम स्तंभ बताते हुए कहा कि मौजूदा अस्थिर अंतरराष्ट्रीय हालात में भारत-यूरोप साझेदारी और ज्यादा जरूरी हो गई है। वीमर ट्रायंगल फॉर्मेट में भारत की पहली भागीदारी के दौरान फ्रांस, जर्मनी और पोलैंड के प्रतिनिधियों के साथ इंडो-पैसिफिक, भारत-ईयू संबंध और यूक्रेन युद्ध पर खुली चर्चा हुई। जयशंकर ने कहा कि भारत और यूरोप मिलकर वैश्विक अर्थव्यवस्था और राजनीति में स्थिरता ला सकते हैं। आने वाले समय में जर्मनी, फ्रांस और यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं की भारत यात्रा इसी दिशा में बढ़ते कूटनीतिक प्रयासों को दर्शाती है।

क्या है वीमर ट्रायंगल?

वीमर ट्रायंगल की स्थापना 1991 में फ्रांस, जर्मनी और पोलैंड ने की थी। इसका मकसद यूरोपीय एकीकरण, सुरक्षा सहयोग और राजनीतिक संवाद को बढ़ावा देना है। अब इसमें भारत की भागीदारी यूरोप की रणनीतिक सोच में एक बड़ा बदलाव मानी जा रही है।

भारत की ऊर्जा नीति में बदलाव

इस कूटनीतिक हलचल के बीच भारत अपनी ऊर्जा रणनीति में भी बदलाव कर रहा है। 2025 में एक समय रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता था, लेकिन हाल के महीनों में उसकी हिस्सेदारी लगातार घट रही है। नवंबर में जहां रूस की हिस्सेदारी करीब एक-तिहाई थी, वहीं अब यह 25 प्रतिशत से नीचे आ चुकी है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, HPCL और MRPL जैसी प्रमुख रिफाइनरियों ने नए अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद रूसी तेल की खरीद रोक दी है, जबकि कुछ कंपनियां गैर-प्रतिबंधित स्रोतों से सीमित आयात जारी रखे हुए हैं।

अमेरिका का सख्त रुख

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने एक द्विदलीय विधेयक को समर्थन दिया है, जिससे रूस से तेल या यूरेनियम खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। इस प्रस्ताव पर अगले सप्ताह अमेरिकी संसद में वोटिंग संभव है।

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