राष्ट्रमंडल बैठक में लोकतंत्र और तकनीक पर जोर, भारत-कनाडा संबंधों को बताया ऐतिहासिक
भारत में कनाडा के उच्चायुक्त क्रिस्टोफर कूटर ने राष्ट्रमंडल अध्यक्षों की मौजूदा बैठक को सदस्य देशों के बीच लोकतांत्रिक परंपराओं और साझा इतिहास को दोबारा मजबूत करने वाला मंच बताया है। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन खास तौर पर भारत और कनाडा के बीच गहरे संस्थागत और लोकतांत्रिक संबंधों की पुष्टि करता है। कूटर ने इस बात पर भी जोर दिया कि राष्ट्रमंडल अध्यक्षों के संगठन की नींव रखने में कनाडा की ऐतिहासिक भूमिका रही है। उनके अनुसार, यह तथ्य दोनों देशों के बीच दशकों से चले आ रहे सहयोग और आपसी विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में विभिन्न देशों के अध्यक्षों की उपस्थिति इस मंच के वैश्विक महत्व को और बढ़ाती है।
बैठक के दौरान लोकतंत्र को राष्ट्रमंडल देशों को जोड़ने वाली केंद्रीय कड़ी के रूप में रेखांकित किया गया। विभिन्न भौगोलिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों के बावजूद, लोकतांत्रिक मूल्य इन देशों को एक साझा उद्देश्य से जोड़ते हैं—यही संदेश चर्चाओं में प्रमुख रूप से उभरकर आया। कनाडाई उच्चायुक्त ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने भारत में लोकतंत्र की ऐतिहासिक गहराई और वैश्विक उत्तर व दक्षिण के देशों को जोड़ने में इसकी भूमिका को बेहद प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया। उनके अनुसार, यह भाषण न केवल प्रेरणादायक था, बल्कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में पूरी तरह प्रासंगिक भी।
कूटर ने आगे कहा कि सम्मेलन में हुई चर्चाओं का एक अहम पहलू संसदीय कार्यप्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का बढ़ता उपयोग रहा। उन्होंने बताया कि अध्यक्षों और संसदीय अधिकारियों के बीच इस बात पर विचार किया गया कि नई तकनीकों को किस तरह अपनाकर लोकतंत्र को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जनता के प्रति जवाबदेह बनाया जा सकता है। उन्होंने निष्कर्ष रूप में कहा कि यह बैठक लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित साझेदारी को नए सिरे से सशक्त करने और भविष्य की चुनौतियों के लिए मिलकर काम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


