भाजपा की महिला मोर्चा की जिला मंत्री शशि तोमर ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा देकर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुलकर नाराज़गी जाहिर की। उन्होंने अपने इस्तीफे की वजह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए कानून को बताया है।
शशि तोमर ने सोशल मीडिया के जरिए इस्तीफे की घोषणा की, जिसके बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई। उन्होंने यूजीसी कानून को सवर्ण समाज के छात्रों के खिलाफ बताया और आरोप लगाया कि यह कानून एक वर्ग विशेष के बच्चों को शैक्षणिक रूप से कमजोर करने की साजिश है। उनका कहना है कि आज़ाद भारत में इस तरह के कानून बच्चों को “गुलामी की ओर धकेलने” का प्रयास हैं। अपने राजनीतिक जीवन का उल्लेख करते हुए शशि तोमर ने कहा कि वे भाजपा की चार बार सक्रिय सदस्य रह चुकी हैं और पूर्व में निर्वाचित क्षेत्र पंचायत सदस्य भी रही हैं। छात्र जीवन में उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में पदाधिकारी के रूप में कार्य किया और मुरैना जिले में संगठन को मजबूती दी।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे यूजीसी के इस कानून का पूर्ण रूप से बहिष्कार करती हैं और किसी भी स्थिति में इसका समर्थन नहीं कर सकतीं। वहीं, भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष श्वेता पोरवाल ने बताया कि शशि तोमर द्वारा इस्तीफे की जानकारी उन्हें व्हाट्सएप के माध्यम से मिली है। उन्होंने कहा कि अभी तक इस्तीफा औपचारिक रूप से प्राप्त नहीं हुआ है और मिलने के बाद संगठन स्तर पर उस पर विचार किया जाएगा।


