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मुजफ्फरनगर अग्निकांड: एक ही चिता पर मां और दो बेटों का अंतिम संस्कार, शुकतीर्थ में गूंजा मातम

“लौट आओ पापा…” एक हादसे ने छीन लिया पूरा परिवार

मुजफ्फरनगर जिले में हुए भीषण अग्निकांड ने एक पूरे परिवार को उजाड़ दिया। देवबंद तहसील में तैनात कानूनगो अमित गौड़, उनके भाई नितिन गौड़ और मां सुशीला का अंतिम संस्कार शुकतीर्थ स्थित बाणगंगा नदी के किनारे एक साथ किया गया। जैसे ही तीनों की चिताओं को मुखाग्नि दी गई, बेटियों की चीख-पुकार से वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। “पापा-चाचा लौट आओ… दादी हमें छोड़कर मत जाओ”—इन शब्दों के साथ बेटियों का विलाप माहौल को और भी गमगीन कर गया। परिजन और रिश्तेदार उन्हें संभालने की कोशिश करते रहे, लेकिन दर्द हर चेहरे पर साफ झलक रहा था।

गैस लीक और अंगीठी बनी मौत की वजह

यह दर्दनाक हादसा सोमवार शाम नई मंडी कोतवाली क्षेत्र की वसुंधरा रेजीडेंसी में हुआ। रसोई गैस लीक होने के बाद कमरे में जलाई गई अंगीठी से आग भड़क उठी। कुछ ही देर में घर में रखे दो गैस सिलिंडर तेज धमाकों के साथ फट गए, जिससे आग ने विकराल रूप ले लिया। अमित गौड़ (47), उनके भाई नितिन गौड़ (45) और मां सुशीला (70) आग और धुएं में फंस गए। पड़ोसी आदित्य राणा उन्हें बचाने के लिए घर में घुसे, लेकिन वे खुद भी झुलस गए।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोला मौत का राज

पोस्टमार्टम के बाद सामने आया कि सुशीला की मौत आग में बुरी तरह झुलसने से हुई, जबकि अमित और नितिन की जान दम घुटने से गई। अत्यधिक धुएं के कारण दोनों भाई बाहर नहीं निकल सके और बुजुर्ग मां भी आग से खुद को बचाने में असमर्थ रहीं।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

हादसे के वक्त अमित की पत्नी ऋचा और बेटियां अक्षिका व आराध्या घर पर नहीं थीं। वे पालतू कुत्ते को टहलाने कॉलोनी में गई हुई थीं। तभी पड़ोसियों ने फोन कर घर से धुआं निकलने की सूचना दी। वे दौड़ते हुए लौटीं, लेकिन उससे पहले ही जोरदार धमाके हो चुके थे और आग पूरे मकान में फैल चुकी थी। ऋचा ने घर में घुसने की कोशिश की, जिसमें उनके हाथ में चोट भी आई, लेकिन लोगों ने उन्हें जबरन दूर हटाया। दमकल विभाग और पुलिस के पहुंचने के बाद आग पर काबू पाया गया और तीनों शव बाहर निकाले गए।

शुकतीर्थ में उमड़ा जनसैलाब

अंतिम संस्कार के दौरान वजीराबाद और आसपास के गांवों से सैकड़ों लोग शुकतीर्थ पहुंचे। रिश्तेदारों, प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने शोकाकुल परिवार को सांत्वना दी। ममेरे भाई अर्पित शर्मा ने तीनों चिताओं को मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार के बाद ऋचा अपनी बेटियों के साथ मायके चली गईं। परिवार का कहना है कि यह हादसा ऐसा जख्म दे गया है, जो जिंदगी भर नहीं भरेगा।

झुलसे आदित्य का इलाज मेरठ में जारी

हादसे में झुलसे आदित्य राणा को पहले स्थानीय मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, इसके बाद बेहतर इलाज के लिए मेरठ भेजा गया। परिजनों के अनुसार उनकी हालत अब स्थिर है और डॉक्टरों की निगरानी में उपचार चल रहा है।

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