भीड़, अतिक्रमण और लापरवाही ने छीनी चार ज़िंदगियां, भांडुप में दिल दहला देने वाला हादसा

मुंबई के भांडुप इलाके में सोमवार रात हुए दर्दनाक सड़क हादसे में तीन महिलाओं सहित चार लोगों की जान चली गई, जबकि नौ अन्य घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि फुटपाथ पर फेरीवालों के कब्जे के कारण पैदल चलने वालों को सड़क पर उतरना पड़ा, जिससे यह हादसा हुआ। यह घटना रात करीब 9:35 से 9:45 बजे के बीच भांडुप रेलवे स्टेशन के बाहर हुई, जहां आमतौर पर भारी भीड़ रहती है। स्टेशन के बाहर सस्ती सब्जियों और अन्य सामान की दुकानों के चलते शाम के समय यहां पैदल यात्रियों की संख्या काफी बढ़ जाती है।
“तेज़ धमाका सुना और लोग हवा में उछलते दिखे”
हादसे की चश्मदीद सैमिनी मुदलियार ने बताया कि वह बस स्टॉप पर खड़ी थीं, तभी अचानक एक ज़ोरदार आवाज़ सुनाई दी। उन्होंने कहा, “आवाज़ सुनते ही मैंने देखा कि बस की टक्कर से लोग हवा में उछल गए। बस कुछ दूरी पर जाकर रुकी, और फिर लोग उसे धकेलने लगे, क्योंकि कई लोग उसके नीचे फंसे हुए थे।” उन्होंने आगे बताया कि जब वह घटनास्थल के पास पहुंचीं तो वहां खून फैला हुआ था और कई शव सड़क पर पड़े थे। एक व्यक्ति का सिर पूरी तरह कुचला हुआ था, जबकि दूसरे को जांघ में गंभीर चोट लगी थी।
भीड़ और यू-टर्न बना बड़ा खतरा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, देर शाम स्टेशन के बाहर फेरीवालों और भीड़ के कारण बसों को यू-टर्न लेने में काफी परेशानी होती है, खासकर उन बसों को जो यहीं आकर समाप्त होती हैं। यही अव्यवस्था हादसे की बड़ी वजह मानी जा रही है।
पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना
मुदलियार ने बताया कि यह बेस्ट की इलेक्ट्रिक बस से जुड़ा दूसरा गंभीर हादसा है। इससे पहले पिछले साल कुर्ला में इसी तरह की दुर्घटना में नौ लोगों की मौत हो गई थी। उन्होंने मांग की कि इन मामलों की निष्पक्ष और गहन जांच हो, ताकि भविष्य में निर्दोष लोगों की जान न जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह जांच की जानी चाहिए कि बस चालक नशे में तो नहीं था।
पुलिस और फोरेंसिक टीम जांच में जुटी
हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और आसपास के दुकानदारों ने तुरंत अपनी दुकानें बंद कर दीं। रातभर और सुबह तक घटनास्थल पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। क्षेत्र को सील कर फोरेंसिक टीम ने सबूत जुटाए। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जांच में बस की तकनीकी स्थिति, चालक की भूमिका और अन्य सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता घायलों का इलाज और हालात को सामान्य करना है।


