इंदौर के बाद अब महू में गंदे पानी से फैला संक्रमण, बच्चों में पीलिया के मामले बढ़े
इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतों का मामला अभी शांत भी नहीं पड़ा था कि जिले के महू से एक और गंभीर तस्वीर सामने आ गई है। यहां गंदे पानी की आपूर्ति के चलते पीलिया जैसे संक्रमण तेजी से फैल रहे हैं, जिनका सबसे बड़ा शिकार बच्चे बन रहे हैं। बीते 10 से 15 दिनों में पत्ती बाजार और मोती महल क्षेत्र से करीब दो दर्जन लोग बीमार हो चुके हैं।
नलों से आ रहा बदबूदार, मटमैला पानी
स्थानीय रहवासियों का कहना है कि घरों में सप्लाई हो रहा पानी न सिर्फ मटमैला है, बल्कि उसमें तेज दुर्गंध भी है। इसी पानी के सेवन के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। हालात ऐसे हैं कि कई परिवारों के एक साथ बच्चे बीमार पड़ गए हैं।
कहीं स्कूल जाने वाले बच्चे बिस्तर से नहीं उठ पा रहे, तो कहीं परीक्षाएं छूट रही हैं। 12वीं की छात्रा अलीना संक्रमण के कारण प्री-बोर्ड परीक्षा नहीं दे सकी, वहीं 9 साल की लक्षिता और 12 साल का गीतांश पीलिया से जूझ रहे हैं। एक ही परिवार के छह बच्चे कई दिनों से बीमार बताए जा रहे हैं।
मोती महल में हालात ज्यादा गंभीर
मोती महल इलाके में स्थिति और भी चिंताजनक है। यहां छोटे बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जबकि एक बुजुर्ग को लिवर इंफेक्शन के चलते इंदौर रेफर किया गया है।
रहवासियों का आरोप है कि उन्होंने पहले भी दूषित पानी की शिकायतें की थीं, लेकिन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लोगों के मुताबिक पेयजल पाइपलाइन गंदे नालों के बीच से गुजर रही है और जगह-जगह लीकेज के कारण नालियों का पानी सप्लाई लाइन में मिल रहा है।
मामला सामने आते ही प्रशासन हरकत में
स्थिति बिगड़ने के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ। प्रभावित इलाकों का निरीक्षण कर पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं। कुछ मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि बाकी का इलाज घर पर चल रहा है।
विधायक और कलेक्टर ने संभाली कमान
बीते गुरुवार रात क्षेत्रीय विधायक उषा ठाकुर प्रभावित इलाकों में पहुंचीं। उन्होंने बीमार बच्चों और परिजनों से मुलाकात कर अधिकारियों को तत्काल इलाज, दवाइयों की उपलब्धता, दूषित पानी की सप्लाई बंद करने और वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था के निर्देश दिए।वहीं, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शिवम वर्मा देर रात महू पहुंचे और रेडक्रास अस्पताल में भर्ती मरीजों से मुलाकात की। उन्होंने डॉक्टरों को साफ निर्देश दिए कि इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर
कलेक्टर के साथ एसडीएम राकेश परमार और एडिशनल एसपी रूपेश द्विवेदी भी मौजूद रहे। स्वास्थ्य विभाग को प्रभावित क्षेत्रों की पूरी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी के मार्गदर्शन में डोर-टू-डोर सर्वे शुरू किया जा रहा है, ताकि शुरुआती लक्षण वाले मरीजों का समय पर इलाज हो सके।
“स्थिति नियंत्रण में, लेकिन निगरानी जारी”
कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि फिलहाल हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। दूषित पानी की पुष्टि होने पर जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। भागीरथपुरा के बाद महू में सामने आया यह मामला एक बार फिर जल आपूर्ति व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है।


