आसमान में भारत की बादशाहत मजबूत: राफेल डील पर सरकार की मुहर
भारत की सैन्य क्षमताओं को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए सरकार ने फ्रांस से नए राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को हरी झंडी दे दी है। यह फैसला नरेंद्र मोदी सरकार के उस विज़न का हिस्सा है, जिसके तहत तीनों सेनाओं को अत्याधुनिक और आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।
114 नए राफेल की खरीद को मंजूरी
रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में, जिसकी अध्यक्षता राजनाथ सिंह ने की, करीब 3.60 लाख करोड़ रुपये की रक्षा खरीद योजनाओं को स्वीकृति दी गई।
इनमें से लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये की डील फ्रांस से 114 नए राफेल लड़ाकू विमानों के लिए है। इनमें से अधिकांश विमान भारत में ही बनाए जाएंगे, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ को भी मजबूती मिलेगी।
राफेल क्यों है भारत की वायुशक्ति की रीढ़?
Dassault Rafale एक मल्टी-रोल फाइटर जेट है, जो हवा से हवा, हवा से जमीन और समुद्री लक्ष्यों पर एक साथ हमला करने में सक्षम है।

मुख्य खूबियां:
- Meteor हवा-से-हवा मिसाइल (100+ किमी रेंज)
- SCALP क्रूज मिसाइल (300–500 किमी तक सटीक हमला)
- HAMMER प्रिसिजन गाइडेड बम
- RBE2 AESA रडार, जो एक साथ 40 लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है
- SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम
थल और नौसेना को भी बड़ी मजबूती
- थल सेना के लिए ‘विभव’ एंटी-टैंक माइंस, ARVs और T-72 टैंकों व BMP-II वाहनों के ओवरहाल को मंजूरी।
- नौसेना के लिए 6 Boeing P-8I Poseidon समुद्री गश्ती विमान खरीदे जाएंगे, जिससे पनडुब्बी रोधी क्षमता और समुद्री निगरानी और सशक्त होगी।
- हाई-एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम (HAPS) से इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (ISR) में बढ़ोतरी होगी।
पहले से सेवा में मौजूद राफेल स्क्वाड्रन
भारत पहले ही 36 राफेल विमानों को अपनी वायुसेना में शामिल कर चुका है, जो अंबाला और हाशिमारा में तैनात हैं।
इसके अलावा, अप्रैल 2025 में 26 राफेल-मरीन विमानों की डील भी हो चुकी है, जिन्हें INS Vikrant और INS Vikramaditya पर तैनात किया जाएगा।


