केंद्रीय हिंदी संस्थान में आयोजित भारतीय पुस्तकालय संघ के एक कार्यक्रम में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े ने कहा कि लंबे समय तक भारत को ऐसा इतिहास पढ़ाया गया, जिससे समाज अपनी मूल सांस्कृतिक पहचान से दूर होता चला गया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को जानबूझकर कम करके प्रस्तुत किया गया। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि हमें यह पढ़ाया गया कि आइज़ैक न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण की खोज की, जबकि प्राचीन भारत में ऋषि भारद्वाज जैसे विद्वानों ने सदियों पहले ही इसके सिद्धांतों पर प्रकाश डाला था।
राज्यपाल ने यह भी कहा कि सामान्यतः राइट बंधु को विमान का आविष्कारक बताया जाता है, जबकि भारतीय ग्रंथों में विमान निर्माण और उड़ान से जुड़ी जानकारी बहुत पहले से उपलब्ध है। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र में एक भारतीय ने 1500 फीट की ऊंचाई तक विमान उड़ाया था, लेकिन अंग्रेज उस तकनीक को अपने साथ ले गए और बाद में उसे अमेरिका के साथ साझा किया गया। इतिहास से जुड़े अन्य संदर्भों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अकबर-जोधा की कहानी को फिल्मों और पुस्तकों में जिस तरह दिखाया गया है, उसका कोई ठोस ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिलता। साथ ही उन्होंने कहा कि तक्षशिला और नालंदा विश्वविद्यालय जैसे विश्वविख्यात शिक्षा केंद्रों को नष्ट कर दिया गया और लाखों पुस्तकों को आग के हवाले कर दिया गया।
राज्यपाल बागड़े ने थॉमस बैबिंगटन मैकाले की शिक्षा नीति की आलोचना करते हुए कहा कि इस पद्धति ने भारतीय संस्कृति और पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था को गहरी चोट पहुंचाई। उनके अनुसार, इसी के कारण लाखों गुरुकुल बंद हो गए। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्राचीन काल से ही भारत में विज्ञान, चिकित्सा, तकनीक, भूगोल, आयुर्वेद और अंतरिक्ष विज्ञान जैसे विषयों का व्यवस्थित अध्ययन कराया जाता रहा है और आज आवश्यकता है कि देश अपनी इस समृद्ध विरासत को फिर से पहचाने और आगे बढ़ाए।


