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बाजरा बिक्री और फसल नुकसान मुआवजे की सूचियों का होगा मिलान, डीएम सख्त

बाजरा खरीद में बड़ा खेल: बाजार का अनाज सरकारी केंद्रों पर बेचने का खुलासा

बाजार में जहां बाजरा 1950 से 2050 रुपये प्रति क्विंटल के दाम पर बिक रहा है, वहीं सरकारी क्रय केंद्रों पर 2775 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद हो रही है। इसी मूल्य अंतर का फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर बाजार से बाजरा उठाकर सरकारी केंद्रों पर बेचने की शिकायतें सामने आईं। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने जांच कराई। जांच रिपोर्ट में जिला विपणन अधिकारी नंद किशोर समेत चार क्रय केंद्र प्रभारियों की लापरवाही उजागर हुई है। इसके बाद जिलाधिकारी ने सभी पांचों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए प्रमुख सचिव, खाद्य एवं रसद आयुक्त और संबंधित मंत्री को पत्र भेजा है।

इसी बीच फर्जी पंजीकरण और ई-खसरा में गड़बड़ी की भी जांच शुरू कर दी गई है। जिलाधिकारी ने एडीएम वित्त एवं राजस्व शुभांगी शुक्ला को निर्देश दिए हैं कि बारिश से फसल नुकसान के बाद मुआवजा लेने वाले किसानों की सूची और बाजरा बेचने वाले किसानों की सूची का आपस में मिलान कराया जाए। इसके अलावा सभी तहसीलों के एसडीएम को ई-खसरा का सत्यापन करने के आदेश दिए गए हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संबंधित किसानों के पास कितनी भूमि थी, कितना उत्पादन हुआ और कितना बाजरा सरकारी केंद्रों पर बेचा गया।

जांच में सबसे ज्यादा अनियमितताएं फतेहपुर सीकरी, खेरागढ़, जगनेर और जैतपुरकलां क्षेत्रों में पाई गई हैं। फतेहपुर सीकरी के विपणन प्रभारी गंगा प्रसाद, जगनेर के निखिल सक्सेना, खेरागढ़ के विकास जयंत और जैतपुरकलां की रीता सेन के खिलाफ भी कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी गई है।

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