मयमनसिंह जिले की घटना के बाद अंतरिम सरकार सख्त रुख में

बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले के वालुका क्षेत्र में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की नृशंस हत्या के मामले में सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ी सफलता हासिल की है। इस सनसनीखेज घटना में शामिल सात लोगों को रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) ने अलग-अलग इलाकों से हिरासत में लिया है। सभी आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है। अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी देते हुए कहा कि सरकार कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
विशेष अभियान के तहत गिरफ्तारी
मुख्य सलाहकार कार्यालय के अनुसार, Rapid Action Battalion की यूनिट RAB-14 ने विशेष अभियान चलाकर सात संदिग्धों को पकड़ा। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में 19 से 46 वर्ष आयु वर्ग के लोग शामिल हैं, जिन्हें अलग-अलग स्थानों से हिरासत में लिया गया। सरकार का कहना है कि प्रारंभिक जांच में घटना को सुनियोजित हिंसा के रूप में देखा जा रहा है और इसके पीछे जिम्मेदार सभी तत्वों की पहचान की जा रही है।
“सांप्रदायिक हिंसा के लिए कोई जगह नहीं”
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि देश में किसी भी तरह की सांप्रदायिक हिंसा अस्वीकार्य है। मोहम्मद यूनुस ने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द को तोड़ने का प्रयास है। सरकार ने पीड़ित परिवार को न्याय का भरोसा दिलाते हुए कहा कि कानून के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत की जाएगी।
घटना की पृष्ठभूमि
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मयमनसिंह में कथित ईशनिंदा के आरोप को लेकर भीड़ ने दीपू चंद्र दास पर हमला किया था। बेरहमी से पीटने के बाद भीड़ ने शव को आग के हवाले कर दिया, जिससे पूरे इलाके में तनाव फैल गया। सरकार ने नागरिकों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की है, साथ ही कहा है कि हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ “शून्य सहनशीलता” की नीति अपनाई जाएगी।


