9.9 C
Agra
Homeदेशपैरेंस पैट्रिए का इस्तेमाल: कोमा में पड़े पति के लिए पत्नी को...

पैरेंस पैट्रिए का इस्तेमाल: कोमा में पड़े पति के लिए पत्नी को मिला कानूनी अधिकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक असाधारण और संवेदनशील मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कोमाग्रस्त व्यक्ति की देखभाल से जुड़ा अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब कोई व्यक्ति स्वयं निर्णय लेने की स्थिति में न हो और कानून में सीधे-सीधे कोई प्रावधान मौजूद न हो, तब न्यायालय अपने विशेष अधिकारों का प्रयोग कर सकता है।

इसी क्रम में Delhi High Court ने प्रोफेसर अलका आचार्य को उनके पति सलाम खान का कानूनी अभिभावक नियुक्त किया है। सलाम खान फरवरी 2025 से कोमा में हैं और ब्रेन हेमरेज के बाद उनकी स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है। वे पूरी तरह से शारीरिक और मानसिक रूप से असमर्थ हैं।

मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति Sachin Datta ने 31 दिसंबर को फैसला सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता की यह चिंता वाजिब है कि मौजूदा कानूनों में पत्नी या कानूनी उत्तराधिकारी को ऐसे मामलों में स्वतः अभिभावकीय अधिकार नहीं मिलते। इसी कारण चिकित्सकीय खर्चों और इलाज से जुड़े निर्णयों के लिए पति के बैंक खातों और अन्य संसाधनों के उपयोग में व्यावहारिक कठिनाइयाँ आ रही थीं।

अदालत ने इस स्थिति को देखते हुए ‘पैरेंस पैट्रिए’ (Parens Patriae) सिद्धांत का सहारा लिया। यह एक लैटिन कानूनी अवधारणा है, जिसका अर्थ है—राज्य या अदालत का उन व्यक्तियों के अभिभावक की भूमिका निभाना, जो स्वयं अपनी देखभाल या फैसले लेने में असमर्थ हों।

इस आदेश के तहत अब प्रोफेसर Alka Acharya अपने पति Salam Khan के इलाज, आर्थिक संसाधनों और देखभाल से जुड़े सभी आवश्यक निर्णय कानूनी रूप से ले सकेंगी। अदालत का यह फैसला ऐसे मामलों में भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है, जहां मानवीय जरूरतें कानून की सीमाओं से आगे खड़ी नजर आती हैं।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments