बिहार की पूर्णिया लोकसभा सीट से सांसद पप्पू यादव को शुक्रवार देर रात पटना स्थित उनके आवास से पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई 1995 के एक पुराने मामले में जमानत समाप्त होने के बाद की गई। गिरफ्तारी के दौरान उनके समर्थकों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया, जिससे इलाके में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। सूत्रों के अनुसार, पप्पू यादव शुक्रवार रात पटना पहुंचे थे। घर पहुंचने के कुछ समय बाद ही पुलिस की टीम वहां पहुंच गई। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेने की कोशिश की, लेकिन पप्पू यादव ने कहा कि वह शनिवार को स्वयं अदालत में पेश होंगे और फिलहाल पुलिस के साथ नहीं जाएंगे। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि उन्हें हाउस अरेस्ट में रखा जाए, लेकिन पुलिस ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। इस बीच, बड़ी संख्या में समर्थक मौके पर जमा हो गए और पुलिस वाहनों पर चढ़कर नारेबाजी करने लगे। हालात बिगड़ते देख अतिरिक्त बल तैनात किया गया। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए पप्पू यादव को हिरासत में लिया और मेडिकल जांच के लिए इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) ले जाया गया। अस्पताल में बेड उपलब्ध न होने के कारण उन्हें डॉक्टरों के रेस्ट रूम में रखा गया।
31 साल पुराना मामला क्या है?
यह मामला वर्ष 1995 का है, जब पटना के गर्दनीबाग थाने में विनोद बिहारी लाल नामक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि उनके मकान को रहने के उद्देश्य से किराए पर लिया गया था, लेकिन बाद में वहां सांसद कार्यालय संचालित किया जाने लगा। शिकायतकर्ता का कहना था कि यह बात उनसे छिपाई गई और उनके साथ धोखाधड़ी की गई।
पप्पू यादव का पक्ष
गिरफ्तारी से पहले पप्पू यादव ने कहा कि उन्हें अदालत के समन की जानकारी है और वह पेश होने के लिए तैयार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में आए और उनके साथ बदसलूकी की। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार की आलोचना करने और हाल में एक नीट अभ्यर्थी की मौत के मामले में आवाज उठाने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।
पुलिस का बयान
पटना के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सांसद/विधायक अदालत द्वारा पप्पू यादव के खिलाफ वारंट जारी किया गया था, क्योंकि वे निर्धारित तारीख पर अदालत में उपस्थित नहीं हुए थे। इसी वारंट के आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया है।


