पल भर में उजड़ गया फौजी का घर, खेलते बच्चे पर गिरी मौत
आगरा जिले के बाह क्षेत्र के बेसंगपुरा गांव में सोमवार शाम एक दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को गम में डुबो दिया। निर्माणाधीन मकान की सीढ़ियां और छत अचानक भरभराकर गिर गईं, जिसके नीचे दबने से 12 वर्षीय अर्पित की मौके पर ही मौत हो गई। वह फौजी धर्मेंद्र सिंह का बड़ा बेटा था। पास ही खेल रहे उसके जुड़वां भाई रामू और श्यामू इस हादसे में चमत्कारिक रूप से बच गए।
हादसा शाम करीब 6:30 बजे उस समय हुआ, जब गांव में तहसीलदार के मकान का निर्माण कार्य चल रहा था। गांव के ही दो मजदूर, आलिम और आरिफ, छत तक बनी सीढ़ियों से ईंट और बालू हटा रहे थे। उसी दौरान सीढ़ियों के पास खेल रहे तीनों बच्चे भी मौजूद थे। तभी अचानक छत का एक पत्थर टूट गया और पूरी संरचना ढह गई। सीढ़ियां गिरते ही पिलर भी टूट गए और मलबे में अर्पित समेत दोनों मजदूर दब गए।
तेज आवाज सुनकर गांव में अफरा-तफरी मच गई। चीख-पुकार सुनकर लोग दौड़ पड़े और किसी तरह मलबा हटाकर तीनों को बाहर निकाला गया। सभी को तुरंत बाह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने अर्पित को मृत घोषित कर दिया। घायल मजदूरों को प्राथमिक इलाज के बाद एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा रेफर कर दिया गया।
बेटे की मौत की खबर ने परिवार को तोड़ कर रख दिया। अयोध्या में तैनात फौजी धर्मेंद्र सिंह को जैसे ही हादसे की सूचना मिली, वे बदहवास हो गए और तुरंत घर के लिए रवाना हो गए। घर पर मौजूद उनकी पत्नी भूरी देवी बेटे का शव देखकर बेसुध हो गईं। अर्पित को अस्पताल लेकर पहुंचे उसके ताऊ रविंद्र सिंह भी मौत की पुष्टि होते ही बेहोश हो गए। उनकी आंखों में बस एक ही सवाल था—अब छोटे बच्चों को क्या जवाब दूंगा?
हादसे में घायल मजदूर आलिम और आरिफ भी मौत के बेहद करीब पहुंच चुके थे। इलाज के दौरान दोनों बार-बार डॉक्टरों से पूछते रहे कि क्या वे बच जाएंगे। अपने हाथ-पैर टटोलते हुए और सिर की चोट के बारे में पूछते हुए उन्होंने बताया कि मलबे में दबते ही उन्हें लगा था कि अब जिंदगी खत्म हो गई। बच जाने पर दोनों ऊपरवाले का शुक्रिया अदा करते नहीं थक रहे थे।


