MBA छात्र एंजेल चकमा की हत्या पर देशभर में आक्रोश, आरोपी की तलाश में नेपाल तक पहुंची पुलिस
‘मैं भी भारतीय हूं’ कहने के बावजूद चाकू से हमला, देहरादून में त्रिपुरा के छात्र की मौत

उत्तराखंड के देहरादून में नस्लीय हिंसा का शिकार हुए त्रिपुरा के एक आदिवासी छात्र की मौत के बाद पूरे त्रिपुरा में शोक और आक्रोश का माहौल है। मृतक छात्र का शव जब उसके गृह राज्य लाया गया, तो लोगों में गहरी नाराज़गी देखी गई और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग तेज़ हो गई। 24 वर्षीय एंजेल चकमा, जो त्रिपुरा के उनाकोटी ज़िले के नंदनगर का रहने वाला था, देहरादून में एक निजी विश्वविद्यालय से एमबीए (फाइनल ईयर) की पढ़ाई कर रहा था। 9 दिसंबर को वह अपने छोटे भाई माइकल के साथ एक स्थानीय बाज़ार में मौजूद था, तभी कुछ लोगों ने उन्हें रोककर कथित तौर पर नस्लीय टिप्पणियां कीं। विवाद बढ़ने के बाद एंजेल पर चाकू से हमला किया गया, जिससे इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए पुष्कर सिंह धामी ने इस हत्या की कड़ी निंदा की और कहा कि सरकार इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है। उन्होंने साफ कहा कि राज्य में रहने वाले हर व्यक्ति की सुरक्षा सरकार की ज़िम्मेदारी है और कानून तोड़ने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने पुलिस को फरार आरोपी की जल्द गिरफ्तारी के निर्देश दिए हैं।
इस मामले में कुल छह आरोपियों की पहचान की गई है, जिनमें से पांच को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। छठा आरोपी, यज्ञराज अवस्थी, नेपाल के कंचनपुर ज़िले का निवासी है और फिलहाल फरार है। उत्तराखंड पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए 25,000 रुपये का इनाम घोषित किया है और उसे पकड़ने के लिए एक विशेष टीम नेपाल भेजी गई है। पीड़ित के पिता तरुण चकमा, जो सीमा सुरक्षा बल (BSF) में कार्यरत हैं, ने पुलिस पर एफआईआर दर्ज करने में देरी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि हमलावरों ने उनके बेटे को “चाइनीज़ मोमो” कहकर अपमानित किया, जबकि एंजेल ने स्पष्ट किया था कि वह भारतीय है। परिवार ने मामले में सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
हालांकि पुलिस का कहना है कि शुरुआत में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया था और छात्र की मौत के बाद हत्या और संयुक्त आपराधिक ज़िम्मेदारी की धाराएं भी जोड़ दी गई हैं। ADGP (कानून-व्यवस्था) डॉ. वी. मुरुगेसन ने कहा कि कानून तोड़ने वालों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस बीच, माणिक साहा ने भी इस घटना को लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से बातचीत की। उन्होंने पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया और कहा कि जांच में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जानी चाहिए। साहा ने बताया कि अब तक पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और बाकी को भी जल्द पकड़ लिया जाएगा।


