फूलों की मालाओं से सजी एक खास गाड़ी… दोनों ओर पंक्तिबद्ध रिक्रूट आरक्षी… और तोपों से गिरते गुलाब के फूल। माहौल उत्सव का था और लोग बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे—विश्व विजेता क्रिकेटर और डीएसपी दीप्ति शर्मा की एक झलक का।

शाम करीब 6:15 बजे दीप्ति पुलिस लाइन पहुँचीं। पुलिस एस्कॉर्ट उन्हें लेकर आया। सदर तहसील के बाहर फूलों से सजी विशेष गाड़ी पर वह अपने पिता भगवान शर्मा और भाई सुमित शर्मा के साथ सवार हुईं। काफिला जैसे ही बढ़ा, तालियों और पुष्पवर्षा से स्वागत शुरू हो गया। दीप्ति ने मुस्कुराकर और हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। पुलिस लाइन में मुख्य द्वार से लेकर बहुद्देशीय हॉल तक आकर्षक सजावट की गई थी। जगह-जगह लगाए गए पोस्टर और बैनर इस क्षण को और भी यादगार बना रहे थे।
रेड कारपेट पर कदम रखते ही गूँजा बैंड
जैसे ही दीप्ति ने रेड कारपेट पर कदम रखा, बैंड की धुनें गूंज उठीं। पुलिसकर्मियों ने दोनों तरफ खड़े होकर तालियों के बीच उन्हें भीतर तक ले जाया। हॉल में प्रवेश करते ही ‘लहरा दो तिरंगा…’ गीत वातावरण में देशभक्ति का रंग घोलने लगा।
पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह देकर दीप्ति, उनके पिता और भाई का सम्मान किया। कार्यक्रम में अपर पुलिस आयुक्त राम बदन सिंह और सभी डीसीपी सहित पुलिस बल मौजूद रहा।
दीप्ति का संदेश: लक्ष्य तय करो, मंज़िल मिलती है
मंच पर पहुंचकर दीप्ति ने सबसे पहले नमस्ते कर सभी को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा— “आज मैं यहां अपने परिवार की वजह से हूं। मां-पिता का आशीर्वाद और भाई का सपोर्ट न होता तो कुछ हासिल नहीं कर पाती। बस लक्ष्य तय करें, मेहनत करें—मुकाम खुद-ब-खुद मिल जाएगा।”
दीप्ति—आगरा ही नहीं, पूरे देश की प्रेरणा
पुलिस आयुक्त दीपक कुमार बोले— “दीप्ति सिर्फ आगरा की नहीं, पूरे राष्ट्र की प्रेरणा हैं। उन्होंने साबित किया कि मेहनत, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति किसी भी लक्ष्य को आसान बना देती है।”
एक ज़िद जिसने दिला दिया विश्व कप का टिकट
कार्यक्रम के दौरान एसीपी डॉ. सुकन्या शर्मा ने दीप्ति के क्रिकेट सफर की प्रेरक कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि दीप्ति बचपन में भाई के साथ प्रैक्टिस मैदान जाने पर अड़ गई थीं। एक गेंद उनके पास आई, जिसे उन्होंने इतनी सधी हुई तरीके से फेंका कि सेलेक्टर हेमलता काला ने उसी पल कह दिया—“ये लड़की देश के लिए खेलेगी।”


