दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) को निर्देश दिया कि वह कॉर्डेलिया क्रूज ड्रग्स मामले से जुड़े आरोपों के संदर्भ में एनसीबी अधिकारी समीर वानखेड़े के विरुद्ध प्रस्तावित अनुशासनात्मक कार्रवाई से संबंधित याचिका पर तय समय-सीमा के भीतर सुनवाई पूरी करे। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अनिल क्षतरपाल और न्यायमूर्ति अमित महाजन की दो-न्यायाधीशों की पीठ ने की। केंद्र सरकार की दलीलों पर गौर करते हुए अदालत ने उल्लेख किया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कॉर्डेलिया क्रूज मामले में एक आरोपी से कथित रूप से रिश्वत मांगे जाने के आरोपों को लेकर नियमित मामला दर्ज किया है।
केंद्र की ओर से यह भी बताया गया कि बॉम्बे हाईकोर्ट में पहले दाखिल एक याचिका के चलते संबंधित अधिकारी को दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम संरक्षण मिला था। साथ ही रिकॉर्ड पर उपलब्ध एक ट्रांसक्रिप्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि जापान बाबू पर एक अलग मामले से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए दबाव बनाया जा रहा था, जिसके कारण जांच प्रभावित हुई। हालांकि, पीठ ने इस चरण पर मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि इस समय विवादित आदेश पर कुछ भी कहना उचित नहीं होगा। अदालत के अनुसार, केंद्र सरकार ने CAT के 27 अगस्त 2025 के उस अंतरिम आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें प्रतिवादी के खिलाफ आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई गई थी।
यह ध्यान में रखते हुए कि मूल याचिका की अंतिम सुनवाई 14 जनवरी 2026 को निर्धारित है, हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की सहमति से याचिका का निपटारा करते हुए स्पष्ट निर्देश जारी किए। CAT को कहा गया है कि वह 14 जनवरी को मामले पर सुनवाई करे और उसी दिन या उसके बाद अधिकतम दस दिनों के भीतर फैसला सुनाने का गंभीर प्रयास करे। साथ ही ट्रिब्यूनल को यह भी निर्देश दिया गया है कि वह पहले पारित अंतरिम आदेश से प्रभावित हुए बिना मूल याचिका पर स्वतंत्र रूप से निर्णय ले।


