दिल्ली की हवा: हर सर्दी लौटता सिस्टम फेल होने का सबूत
हर साल सर्दियों के आते ही दिल्ली की हवा इंसानों के लिए दुश्मन बन जाती है। आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ़, बंद स्कूल, और धुंध में गायब होती सड़कें — यह सब अब “असाधारण” नहीं रहा, बल्कि एक डरावना रूटीन बन चुका है। राजनीति आरोपों में उलझ जाती है, अदालतें सख़्त आदेश देती हैं, और टीवी चैनल आपदा का शोर मचाते हैं। फिर कुछ हफ्तों बाद, जब हवा थोड़ी साफ़ होती है, तो यह संकट भी स्मृति से मिट जाता है — अगले साल लौटने के लिए। अक्सर इसे मौसमी समस्या कहकर टाल दिया जाता है, लेकिन सच्चाई इससे कहीं ज़्यादा गहरी है। दिल्ली का स्मॉग किसी अचानक आई विपत्ति का नतीजा नहीं, बल्कि वर्षों की नीतिगत लापरवाही, कमजोर प्लानिंग, अधूरी पर्यावरणीय सोच और नागरिक उदासीनता का परिणाम है। यह हवा में तैरता ज़हर नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी का धुआं है।

सरकार के नए फैसले: ट्रांसपोर्ट से लेकर कचरे तक
इन्हीं हालात के बीच, राजधानी में बिगड़ते वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली सरकार ने कई अहम फैसले किए हैं। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक के बाद पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इन कदमों की जानकारी दी। सबसे बड़ा बदलाव पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जुड़ा है। अब दिल्ली की सभी बसों का संचालन पूरी तरह दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (DTC) करेगा। इससे पहले, आधी बसें दिल्ली इंटीग्रेटेड मल्टी-मॉडल ट्रांजिट सिस्टम (DIMTS) के तहत चलती थीं। सरकार का मानना है कि एकीकृत संचालन से बस रूट बेहतर होंगे और यात्रियों को ज़्यादा भरोसेमंद सेवा मिलेगी। इसके साथ ही, होलांबी कलां में एक बड़े ई-कचरा रीसाइक्लिंग प्लांट को मंज़ूरी दी गई है। करीब 11.5 एकड़ में बनने वाला यह प्लांट बिना पानी की खपत के काम करेगा, जो पर्यावरणीय लिहाज़ से अहम माना जा रहा है।
जल निकायों की वापसी की योजना
दिल्ली के सूखते तालाबों और झीलों को फिर से ज़िंदा करने की दिशा में भी सरकार ने कदम बढ़ाया है। राजधानी में मौजूद एक हज़ार से ज़्यादा जल निकायों में से 160 सीधे सरकारी नियंत्रण में हैं। इनकी बहाली के लिए शुरुआती तौर पर 100 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है, जिसे ज़रूरत पड़ने पर बढ़ाया जा सकता है।
बिना PUC, नहीं मिलेगा पेट्रोल
प्रदूषण पर सख्ती दिखाते हुए सरकार ने साफ़ कर दिया है कि ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) हटने के बाद भी बिना वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट (PUC) के किसी वाहन को पेट्रोल नहीं मिलेगा। PUC केंद्रों की जांच में अब तक 12 केंद्रों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा, चार ऑटोमैटिक व्हीकल टेस्टिंग सेंटर्स को भी मंज़ूरी दी गई है। ऊंची इमारतों पर एंटी-स्मॉग गन और मिस्ट कैनन के इस्तेमाल की इजाज़त भी दी गई है।
प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्रीज़ पर गाज
औद्योगिक प्रदूषण के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सरकार ने 800 से ज़्यादा प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों को बंद करने का फैसला लिया है। दिल्ली प्रदूषण कंट्रोल कमेटी ने 411 इकाइयों को बंद करने के नोटिस भेजे हैं, जबकि नगर निगम ने करीब 400 उद्योगों को सील कर दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दो टूक कहा है कि प्रदूषण के किसी भी स्रोत के लिए अब कोई ढील नहीं दी जाएगी। सरकार की नीति साफ़ है — ज़ीरो टॉलरेंस।
आगे की रणनीति
सोमवार को दिल्ली सचिवालय में हुई एक हाई-लेवल बैठक में आने वाले कदमों पर भी चर्चा हुई। इसमें PUC नियमों को बिना किसी छूट के लागू करने, दिल्ली-NCR में साझा इलेक्ट्रिक बस सेवा शुरू करने, ई-रिक्शा के लिए नई गाइडलाइंस लाने और बस रूट सिस्टम को और बेहतर बनाने जैसे प्रस्ताव शामिल रहे। सवाल अब यह है कि क्या ये फैसले सिर्फ़ काग़ज़ों तक सीमित रहेंगे, या सच में दिल्ली की हवा को सांस लेने लायक बना पाएंगे? क्योंकि दिल्ली को अब तात्कालिक राहत नहीं, बल्कि स्थायी इलाज की ज़रूरत है।


