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दर्दनाक हादसा: बेसमेंट की दीवार गिरी, दो की मौत, गांव में पसरा सन्नाटा

आगरा जिले के बाह क्षेत्र के बिजकौली गांव में रविवार सुबह एक निर्माणाधीन मकान में बड़ा हादसा हो गया। करीब 11 बजे बेसमेंट में मिट्टी भराव के दौरान अचानक दीवार भरभराकर गिर पड़ी। उस वक्त अंदर बैठे लोग मलबे की चपेट में आ गए। कुछ ही पलों में चीख-पुकार मच गई और गांव में अफरा-तफरी फैल गई। मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए खुद ही मलबा हटाना शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद सात लोगों को बाहर निकाला गया और इलाज के लिए अस्पताल रवाना किया गया। दुर्भाग्य से 60 वर्षीय हीरालाल ने आगरा ले जाते समय रास्ते में ही दम तोड़ दिया, जबकि 45 वर्षीय योगेश कुमार ने एसएन मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। पांच अन्य घायलों का इलाज जारी है।

निर्माणाधीन बेसमेंट की दीवार ढही।

ताश खेलते वक्त आ गई मौत

ग्रामीणों के अनुसार, जोर सिंह के निर्माणाधीन मकान के बेसमेंट में कुछ लोग बैठकर ताश खेल रहे थे। उसी दौरान वहां मिट्टी का भराव चल रहा था। बताया जा रहा है कि मिट्टी में पानी डालने से दीवार पर अचानक दबाव बढ़ गया और वह गिर गई। देखते ही देखते बेसमेंट मलबे में तब्दील हो गया।

प्रशासन और पुलिस मौके पर

घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम संतोष कुमार शुक्ला, तहसीलदार संपूर्ण कुलश्रेष्ठ, बीडीओ नीरज तिवारी और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। घायलों को ग्रामीणों की मदद से तुरंत अस्पताल भिजवाया गया। पुलिस ने मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम कराया।

उजड़ गए परिवार

हीरालाल की मौत से उनकी पत्नी सुशीला देवी बेसुध हैं। उनका कहना है कि पति खाना खाने की बात कहकर गए थे, लेकिन लौटकर नहीं आए। वहीं, योगेश कुमार अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले थे। उनके जाने से पत्नी बबली, बच्चों और बुजुर्ग मां के सामने जीवन की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। बेटी की शादी और बच्चों की परवरिश की चिंता ने परिवार को तोड़कर रख दिया है।

सुरक्षा में लापरवाही पर सवाल

गांव में चर्चा है कि बेसमेंट निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों की पूरी तरह अनदेखी की गई थी। न तो दीवारों को सहारा देने की कोई व्यवस्था थी और न ही मिट्टी भराव के दौरान एहतियात बरती गई। पानी डालने से दीवार पर दबाव बढ़ा और हादसा हो गया। प्रशासन का कहना है कि जांच के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट होगा।

जेसीबी से कराई गई खुदाई

शुरुआत में यह आशंका जताई गई कि मलबे में और लोग दबे हो सकते हैं। इसी कारण जेसीबी मंगवाकर करीब तीन घंटे तक खुदाई कराई गई। बाद में पुष्टि हुई कि हादसे में कुल सात लोग ही दबे थे।

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